विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

PHC में डॉक्टर नहीं, रास्ते में बर्फबारी... कश्मीर में प्रसव पीड़ा से तड़पती रही महिला, मां-नवजात दोनों की मौत

Published: Wed, 14 Oct 2026 03:07 PM (IST)

गुरेज में चिकित्सा सुविधाओं की कमी और भारी बर्फबारी के कारण एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत ...और पढ़ें

गुरेज में इलाज की कमी के कारण मां-नवजात की मौत। (फाइल फोटो)

गुरेज में इलाज की कमी के कारण मां-नवजात की मौत। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कश्मीर के गुरेज में मां-नवजात की मौत, चिकित्सा अभाव।

  2. बर्फबारी ने रोकी अस्पताल तक पहुंच, गंभीर स्थिति।

  3. स्थानीय लोगों में रोष, जांच की मांग।

जागरण संवाददाता, श्रीनगर। गुरेज में इलाज की पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण एक महिला और उसके नवजात की जान चली गई। इस घटना ने एक बार फिर घाटी के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की पोल खोल दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार को प्रसव पीड़ा से ग्रस्त गुरेज की एक गर्भवती महिला सईदा बानो को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शेखपोरा पहुंचाया गया। उसे उपजिला अस्पताल दावर रेफर किया गया। जहां महिला ने मृत शिशु को जन्म दिया और कुछ देर बाद उसकी भी मौत हो गई। इस घटना से उसके परिजनों व स्थानीय लोगों में काफी रोश है।

महिला के परिवार का आरोप 

महिला के परिवार ने आरोप लगाया है कि जब महिला को चिकत्सा सहायता की ज़रूरत थी, तब पीएचसी शेखपोरा में कोई डाक्टर मौजूद नहीं था। महिला के एक परिजन ने कहा, 'पीएचसी शेखपोरा तो खुला था लेकिन वहां कोई डाक्टर मौजूद नहीं था और इस बीच वहां मौजूद पेरामेडिकल स्टाफ ने महिला को उपजिला अस्पताल दावर रेफर किया। जहां मां व शिशु दोनों ने दम तोड़ दिया।'

उनके अनुसार शिशु की मौत के बाद महिला की जान बचाई जा सकती थी, लेकिन डाक्टरों ने हमें बताया कि यहां एेसी सुविधा नहीं है। जबकि ब्लड बैंक में खून भी उपलब्ध नहीं है। लिहाजा महिला को जिला अस्पताल बाडीपुर पहुंचाना जरूरी है।

परिजन ने कहा, 'इन अस्पताल वालों ने हमें एम्बयूलेंस भी दी लेकिन बर्फबारी के चलते जिला अस्पताल तक पहुंचना संभव न हो सका और इसका खामयाजा महिला को अपनी जान गंवाकर भुग्तना पड़ा।'

आज गुरेज में हड़ताल रही

लोगों ने इस मामले की पूरी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में पीएचसी शेखपोरा और एसडीएच दावर में महिला को मिले इलाज, खून की उपलब्धता, उसे अस्पताल रेफर करने में हुई देरी और बांडीपुरा ले जाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने की कोशिशों को भी शामिल किया जाए।

स्थानीय लोगों ने कहा कि मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और किसी की जान खतरे में न पड़े। घटना के विरोध में आज गुरेज में हड़ताल रही और लोगों ने प्रदर्शन कर अपना रोष जताया।

गर्भ में ही हो चुकी थी शिशु की मौत

वहीं, बीएमओ गुरेज ने घटना पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि महिला को जब पीएचसी शेखपोरा से उपजिला अस्पताल दावर रेफर किया गया, तब उसका हीमोग्लोबिन स्तर 5 ग्राम प्रति डेसीलीटर था। उसे शॉक की हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि महिला के गर्भ में ही शिशु की मौत होने की रिपोर्ट पहले ही आ चुकी थी।

बीएमओ के अनुसार उक्त अस्पताल(उपजिला अस्पताल) के डाक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की और समय पर जिला अस्पताल बांडीपोरा रेफर करने की का भी प्रयास किया। लेकिन बर्फबारी की वजह से जिला अस्पताल तक जाने वाली सड़क बंद होने के कारण एम्बुलेंस अस्पताल नही पहुंच सकी।

बर्फबारी से सड़क पर आवाजाही में आई दिक्कत

एसडीएम गुरेज ने बताया कि प्रशासन ने एम्बुलेंस के आने-जाने में मदद करने की पूरी कोशिश की। उन्होंने कहा कि सड़क पर बर्फ जमा हो गई थी और बर्फबारी जारी थी, जिससे सड़क पर आवाजाही में दिक्कतें हो रही थी। उन्होंने कहा कि बीआरओ से सुबह-सुबह सड़क साफ़ करने का आग्रह किया था। उनके अनुसार मरीज़ को उसी सुबह बांडीपुरा रेफर कर दिया गया था लेकिन तब तक उसकी सांसें थम गई थी।

इस घटना ने एक बार फिर दूर-दराज के इलाकों के लोगों को मेडिकल इमरजेंसी के दौरान होने वाली मुश्किलों को दिखाया है, जब खराब मौसम और सड़कें बंद होने से खास हेल्थकेयर तक पहुंच नहीं हो पाती है।

सर्दियों में घाटी के बाकी हिस्सों से कट जाता है गुरेज

 भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में गुरेज बांडीपुरा और घाटी के बाकी हिस्सों से कट जाता है। अभी सर्दियों की शुरुआत ही हुई है, लेकिन गुरेज से ऐसी दुखद घटनाओं की खबरें आने लगी हैं। सिर्फ गुरेज ही नहीं, बल्कि कुपवाड़ा, बारामुला, बड़गाम और घाटी के दूसरे दूरदराज व पहाड़ी इलाकों का संपर्क भी बर्फबारी के कारण बाकी हिस्सों से कट जाता है।

ऐसे हालात में स्थानीय लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधाएं मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इन इलाकों में समय पर इलाज या चिकित्सा सहायता नहीं मिलने से मरीजों की जान तक खतरे में पड़ जाती है।