कश्मीर के 90% अंगूर अकेले इस गांव में, इटली से होती है तुलना; पढ़िए घाटी के 'ग्रेप्स विलेज' की कहानी
Grape Village of Kashmir: गांदरबल के रेपोरा गांव में अंगूर की बंपर पैदावार हुई है, जबकि अन्य फसलें प्रभावित हुईं। ...और पढ़ें

मौसम की मार के बावजूद गांदरबल के रेपोरा में अंगूरों की दमदार पैदावार। (फाइल फोटो)
HighLights
रेपोरा गांव में अंगूर की फसल पर मौसम का असर नहीं।
गांदरबल में प्रति वर्ष 1500-1700 मीट्रिक टन अंगूर उत्पादन।
अंगूर की खेती रेपोरा के लोगों की मुख्य आजीविका।
रजिया नूर, श्रीनगर। इस साल अनिश्चिताओं से भरे मौसम ने जहां किसानों की उम्मीदों पर पानी फैर दिया और उनकी फसलों को भारी नुकसान हुआ। वहीं इस मौसम से अंगूरों की फसल पर प्रभाव नहीं पड़ा। इस वर्ष भी ग्रेप्स विलेज के नाम से मशहूर गांदरबल जिले का रेपोरा गांव लाल और बैंगनी अंगूरों की खुशबू से महकता रहा।
मध्य कश्मीर की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित रेपोरा गांव श्रीनगर से करीब 30 किलोमीटर उत्तर में है। यहां अंगूर उत्पादक मोहम्मद रफीक राथर अक्टूबर की एक ठंडी सुबह अपने परिवार के साथ चार कनाल में फैले अंगूर के बाग में दवाई छिड़क रहे हैं। बाग में अंगूर की सैकड़ों बेलें हैं, जिनकी शाखाएं बड़ी-बड़ी हरी पत्तियों से ढकी हुई हैं।
इन पत्तियों के कारण पेड़ों पर दवाई छिड़कने में थोड़ी परेशानी हो रही है। कुछ ही दिनों में ये पत्तियां गिरने लगेंगी। इसके बावजूद रफीक और उनका परिवार मेहनत से अंगूर की बेलों के तनों तक दवाई पहुंचा रहे हैं, ताकि बेलें स्वस्थ रहें और अगली फसल के लिए तैयार हो सकें।
अंगूर की तुड़ाई के बाद बागों की देखभाल में जुटे किसान
रफीक के साथ-साथ गांव के सभी अंगूर उत्पादक पेड़ों से अंगूर तोड़ चुके हैं। अब वे अपने बागों में अंगूर की बेलों की देखभाल करने और उन पर दवाइयों का छिड़काव करने में व्यस्त हैं। कुछ दिन पहले तक रेपोरा गांव लाल, हरे और बैंगनी रंग के अंगूरों से महक रहा था।
अब बेलों पर लगे बड़े-बड़े हरे पत्ते बागों को एक अलग ही खूबसूरती दे रहे हैं। इन खूबसूरत नजारों के बीच स्थानीय लोग अपने अंगूर के बागों की देखभाल करते नजर आ रहे हैं।
मौसम की मार के बावजूद अंगूर की अच्छी पैदावार
रफीक ने कहा कि खुदा का शुक्र है कि इस साल भी अंगूर की फसल अच्छी हुई। हालांकि, इस साल मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों और फल उत्पादकों को काफी नुकसान पहुंचाया। कई बार ओलावृष्टि, तेज आंधी और तूफानी बारिश से फसलें बर्बाद हुईं। लेकिन राहत की बात यह रही कि इनका अंगूर की फसल पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
रफीक ने बताया कि उनके गांव में बारिश तो हुई, लेकिन ओले नहीं गिरे। इससे अंगूर की फसल सुरक्षित रही और अच्छी पैदावार हुई। उन्होंने कहा कि इन दिनों किसान अंगूर की बेलों की देखभाल कर रहे हैं, ताकि पेड़ अगली फसल के लिए तैयार हो सकें।
घाटी में सबसे ज्यादा अंगूर की खेती रेपोरा में
बता दें कि कश्मीर घाटी में होने वाली अंगूर की खेती का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा गांदरबल के रेपोरा गांव में होता है। यहां के लोगों ने सेब के बागों और केसर की खेती पर पारंपरिक निर्भरता से अलग अपनी पहचान बनाई है। जुलाई से सितंबर के मध्य तक गांव में अंगूर की बेलें हरे, बैंगनी और लाल रंग के बड़े-बड़े गुच्छों से लदी रहती हैं। सितंबर के अंत तक अंगूरों को बेलों से तोड़ लिया जाता है।
206 हेक्टेयर में अंगूर की खेती
गांदरबल ज़िले में लगभग 206 हेक्टेयर जमीन (इसमें से 85 प्रतिशत अंगूर रेपोरा में उगाए जाते हैं) पर अंगूर काश्त किए जाते हैं और यहां प्रति वर्ष लगभग 1,500 से 1,700 मीट्रिक टन अंगूरों की पैदावार होती है। उत्पादक साहिबी, हुसैनी, किशमिश और पर्लेट जैसी अंगूरों की मशहूर किस्मों की खेती करते हैं और इस उपज का ज्यादा हिस्सा स्थानीय मार्केट को जाता है जबकि कुछ बाहर के मार्केट में भी सप्लाई की जाती है।
साहिबी और हुसैनी इस इलाके में उगाई जाने वाली मुख्य कमर्शियल अंगूर की किस्में हैं। थामसन अंगूर का इस्तेमाल मुख्य रूप से किशमिश बनाने के लिए किया जाता है, जबकि साहिबी को इस इलाके की प्रीमियम रंगीन अंगूर की किस्मों में से एक माना जाता है।
अंगूर की खेती ही रेपोरा के लोगों की रोजी-रोटी का मुख्य जरिया
उत्पादकों का कहना है कि रेपोरा के अंगूरों का एक बड़ा फायदा यह है कि उन्हें जल्दी कटाई के लिए रखा जा सकता है। यह फसल ऐसे समय में तैयार होती है जब इटली को छोड़कर दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में ताज़े अंगूर नहीं मिलते।
गुलाम हसन गनई नामक एक स्थानीय उत्पादक ने कहा, 'हमारा सारा गांव इसी अंगूर उत्पादन से जुड़ा है और यह हमारी आमदनी का एक मात्र साधन है। अंगूर की खेती हम लोगों की रोज़ी-रोटी का मुख्य ज़रिया है।'
उन्होंने कहा कि इस इलाके में अंगूर की खेती महाराजा हरि सिंह के समय से होती आ रही है। गनई ने कह, महाराजा हरि सिंह रेपोरा में अपनी ज़मीन पर अंगूर उगाते थे जो अब हार्टिकल्चर डिपार्टमेंट के पास है।
