लंपी स्किन डिजीज से कैसे बचाएं गाय-भैंस? कश्मीर के गांदरबल में 350 से ज्यादा पशु चपेट में, जानें बचाव के तरीके
गांदरबल पशुपालन विभाग ने लंपी स्किन डिजीज पर एक जन-जागरूकता एडवाइजरी जारी की है, जिसमें पशुपालकों से संदिग्ध मामलों की ...और पढ़ें

गांदरबल में लंपी स्किन डिजीज पर महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी। (फाइल फोटो)
HighLights
पशुपालन विभाग ने लंपी स्किन डिजीज पर एडवाइजरी जारी की।
संक्रमित पशुओं को अलग रखें, तुरंत सूचना दें, टीकाकरण कराएं।
यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती, हेल्पलाइन 1962 पर संपर्क करें।
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। गांदरबल के पशुपालन विभाग ने लंम्पी स्किन डिसीज को लेकर एक जन-जागरूकता एडवाइजरी जारी की है। इसमें पशुपालकों से अपील की गई है कि वे बीमारी के संदिग्ध मामलों की तुरंत सूचना दें, संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और प्रभावित इलाकों से पशुओं को दूसरी जगह न ले जाएं। यह एडवाइजरी पिछले महीने सामने आए संक्रमण के मामलों के बाद जारी की गई है, जब मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के कई गांवों में 350 से अधिक पशु इस बीमारी की चपेट में आ गए थे।
एडवाइजरी के अनुसार, लंम्पी स्किन डिसीज एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो पाक्सवायरस के कारण होती है। यह गाय, भैंस और अन्य पशुओं को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों में बुखार आना, त्वचा पर गांठें बनना, दूध उत्पादन में कमी और वजन घटना शामिल हैं। गंभीर मामलों में, पशुओं को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और उनकी मौत भी हो सकती है।
इन लक्षणों पर नजर रखें
विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे पशुओं में इन लक्षणों पर नजर रखें, तेज बुखार, त्वचा पर सख्त गांठें, लिम्फ नोड्स (ग्रंथियों) में सूजन, आंखों और नाक से पानी या स्राव आना, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में कमी।
यह बीमारी काटने वाले कीड़ों, जैसे मच्छर, मक्खियों और छोटी मक्खियों के जरिए फैल सकती है। इसके अलावा, यह संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क में आने, दूषित बिस्तर, चारे, पानी या उपकरणों के इस्तेमाल से, और संक्रमित पशुओं, वाहनों या लोगों की आवाजाही से भी फैल सकती है।
टीकाकरण और साफ-सफाई से करें बचाव
किसानों से कहा गया है कि अगर उन्हें अपने पशुओं में इस बीमारी के लक्षण दिखें, तो वे तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा उप-केंद्र से संपर्क करें। उन्हें यह भी सलाह दी गई है कि वे संदिग्ध या संक्रमित पशुओं को न बेचें और न ही उन्हें कहीं और ले जाएं, बल्कि पशु चिकित्सकों के निर्देशों का पालन करें।
बचाव के उपायों के तौर पर, विभाग ने पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुसार नियमित टीकाकरण कराने, काटने वाले कीड़ों को नियंत्रित करने, फार्म की साफ-सफाई रखने और कीटाणुशोधन करने पर जोर दिया है। साथ ही, नए लाए गए या कहीं से वापस लौटे पशुओं को अलग रखने और प्रभावित इलाकों से पशुओं को दूसरी जगह न ले जाने की सलाह दी गई है।
इंसानों में नहीं फैलती लंपी स्किन डिजीज
एडवाइजरी में किसानों को चेतावनी दी गई है कि वे बुखार या त्वचा पर गांठों को नजरअंदाज न करें और न ही किसी ऐसी दवा का इस्तेमाल करें जो प्रमाणित न हो या घर पर बनाई गई हो। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे कोई गलत जानकारी न फैलाएं और न ही घबराहट पैदा करें।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि लंम्पी स्किन डिसीज एक ज़ूनोटिक' बीमारी नहीं है, यानी यह इंसानों में नहीं फैलती है।एडवाइजरी के अनुसार, पशुपालक मदद के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 पर संपर्क कर सकते हैं।
