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    कश्मीर में चुनाव लड़ने की तैयारी में पूर्व आतंकी, बोले- 'हमारा मुद्दा जिहाद या 370 नहीं, सिर्फ शांति और खुशहाली'

    Updated: Thu, 01 Aug 2024 12:55 AM (IST)

    जम्मू-कश्मीर में लगातार सुधरते हालातों के बीच कई पूर्व आतंकी बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के मूड में लग रहे हैं। इसके लिए वो अलग राजनीतिक दल बनाकर विधानसभा चुनाव भी लड़ सकते हैं। कई पूर्व आतंकी बोले कि जिहाद आतंकवाद या 370 हमारा मुद्दा नहीं है। हम शांति खुशहाली चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जमात ए इस्लामी चुनाव लड़ने की बात कर सकती है तो हम क्यों नहीं।

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    कश्मीर में अपना राजनीतिक दल बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में पूर्व आतंकी (सांकेतिक)।

    राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में लगातार सुधरते हालात और बदलते राजनीतिक परिदृश्य का असर बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले पूर्व आतंकियों पर साफ दिखने लगा है। मुख्यधारा में लौटे कई पूर्व आतंकी भी एक अलग राजनीतिक दल बनाकर विधानसभा चुनाव (Jammu Kashmir Assembly Election) में उतरने के मूड़ में हैं।

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    बंदूक छोड़कर मुख्यधारा की राजनीति में आजमा चुके भाग्य

    पहले भी कई आतंकी बंदूक छोड़कर मुख्यधारा की राजनीति में भाग्य आजमा चुके हैं, लेकिन उन्होंने ये सब क्षेत्रीय दलों के सहारे ही किया। इस बार पूर्व आतंकी अपना कोई संगठन बना सकते हैं। हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े रहे एक पूर्व आतंकी फारूक बट ने कहा कि कश्मीर में एक नहीं, हजारों पूर्व आतंकी हैं, जिन्होंने गुमराह होकर बंदूक उठाई थी। बाद में जब उन्हें समझ आई तो आत्मसमर्पण कर दिया। कई ने जेल भी काटी और आज सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।

    हमारे नाम पर वोट बटोरे, पर नहीं किया समस्या का समाधान- फारूक बट

    पूर्व आतंकी फारूक बट ने कहा कि नेशनल कान्फ्रेंस, कांग्रेस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, पीपुल्स कान्फ्रेंस समेत हर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल ने हमारे कल्याण का यकीन दिलाते हुए हमसे वोट मांगे। हमारे कई साथियों को इन दलों के नेताओं ने हार पहनाकर अपने साथ शामिल भी किया और हमारे नाम पर वोट भी बटोरे, लेकिन हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। इसलिए हम चाहते हैं कि हमारी बात करने वाला, कश्मीरियों की बात करने वाला कोई संगठन हो। जिहाद, आतंकवाद, आजादी, स्टेटहुड, 370 हमारा मुद्दा नहीं है।

    जब तक हमारा कोई दल नहीं होगा, बात नहीं सुनी जाएगी- फारूक बट

    उन्होंने कहा कि हमारा मुद्दा जम्मू-कश्मीर में शांति खुशहाली और बंदूक छोड़कर एक सामान्य जिंदगी जी रहे पूर्व आतंकियों और उनके स्वजनों के मानवीय मुद्दों का समाधान है। अनंतनाग जिला के मामूसा के एक अन्य पूर्व आतंकी ने कहा कि मैं पीपुल्स कान्फ्रेंस में भी शामिल रहा हूं, लेकिन हमारी समस्याओं के समाधान के नाम पर वोट मांगा जाता है, उन्हें हल नहीं किया जाता। इसलिए जब तक हमारा अपना कोई दल नहीं होगा, बात सुनी नहीं जाएगी।

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    साथ ही कहा कि अगर हमें गुमराह करने वाली जमात-ए-इस्लामी चुनाव लड़ने की बात कर सकती है तो हम चुनाव क्यों नहीं लड़ सकते। सैकड़ों ऐसे लोग हैं, जिन्होंने बंदूक जरूर उठाई थी, लेकिन चलाई नहीं और आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो गए। हम अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपना राजनीतिक दल बनाएंगे।

    कई पूर्व आतंकी बने हैं एमएलसी, विधायक व मंत्री

    कश्मीर मामलों के जानकार सलीम रेशी ने कहा कि यहां जावेद शाह, फिरदौस शाह जैसे पूर्व आतंकी मुख्यधारा में शामिल होने के बाद विधानसभा परिषद में एमएलसी तक बनाए गए। ऐसे ही कूका पारे चुनाव जीतकर विधायक बना। उस्मान मजीद जो कांग्रेस के नेता हैं और पूर्व मंत्री रहे हैं, वह भी एक पूर्व आतंकी हैं।

    बिलाल लोधी को पीडीपी ने और फिरदौस शाह और जावेद शाह को नेशनल कान्फ्रेंस ने एमएलसी बनाया था। भाजपा के टिकट पर भी कई पूर्व आतंकी विधानसभा और नगर निकाय के चुनाव में अपना भाग्य आजमा चुके हैं। कहा कि देश की एकता अखंडता में विश्वास रखने वालों को चुनाव लड़ने के अधिकार से दूर नहीं रखा जा सकता।

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