चिनाब नदी पर 1850 MW की सावलकोट जलविद्युत परियोजना, अदाणी समेत 5 कंपनियों ने लगाई बोली; 40 साल से अटका था प्रोजेक्ट
जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी 1,850 मेगावाट की सावलकूट जलविद्युत परियोजना के पहले पैकेज के लिए पांच कंपनियों ने बोली लगाई है।
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चिनाब नदी पर 1850 MW की सावलकोट जलविद्युत परियोजना। फाइल फोटो
HighLights
पांच कंपनियों ने सावलकूट परियोजना के पहले पैकेज पर बोली लगाई।
एनएचपीसी ने 5,129 करोड़ रुपये के प्रथम पैकेज की बोली खोली।
यह जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी 1,850 मेगावाट की परियोजना होगी।
नवीन नवाज, श्रीनगर। चिनाब नदी पर प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी 1,850 मेगावाट की सावलकूट जलविद्युत परियोजना के प्रथम पैकेज के लिए पांच प्रमुख कंपनियों ने बोली लगाई है। इनमें अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड, पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (एलएंडटी) और रित्विक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) ने बुधवार को परियोजना के 5,129 करोड़ रुपये के प्रथम पैकेज की बोली खोली। कई बार देरी और समयसीमा बढ़ाए जाने के बाद बुधवार दोपहर तीन बजे बोली प्रक्रिया शुरू हुई।
प्रथम पैकेज के तहत सिविल और हाइड्रो-मैकेनिकल कार्य किए जाने हैं। इनमें काफर डैम, डायवर्जन टनल, सड़क निर्माण और अन्य संबंधित बुनियादी ढांचे का काम शामिल है। इस पैकेज के तहत होने वाले कार्यों को पूरा करने की समयसीमा नौ वर्ष निर्धारित की गई है।
तीन जिलों में फैलेगी परियोजना
सावलकूट जलविद्युत परियोजना करीब 1,401.35 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसमें 840 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है। पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 31,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
परियोजना का विस्तार जम्मू-कश्मीर के रामबन, रियासी और उधमपुर जिलों तक होगा। पूरी होने के बाद यह जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना होगी।
परियोजना की लागत और काम के बड़े दायरे को देखते हुए निर्माण कार्य को कई पैकेज में बांटा गया है। प्रथम पैकेज की बोली प्रक्रिया में शामिल कंपनियों का पहले तकनीकी और विशेषज्ञता के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद पात्र कंपनियों की वित्तीय बोलियां खोली जाएंगी।
कंपनियों के लिए तय थी वित्तीय पात्रता
बोली में शामिल होने वाली कंपनियों के लिए पिछले दो वर्षों में 600 करोड़ रुपये से अधिक का औसत वार्षिक कारोबार और कम से कम 95 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी की शर्त रखी गई थी।
गौरतलब है कि किसी कंपनी का इस निविदा प्रक्रिया में शामिल होना यह नहीं दर्शाता कि उसे 5,129 करोड़ रुपये का ठेका मिल गया है। पहले तकनीकी मूल्यांकन होगा और उसके बाद योग्य बोलीदाताओं की वित्तीय बोलियों पर फैसला लिया जाएगा।
चार दशक से अटकी थी परियोजना
चिनाब नदी पर प्रस्तावित इस महत्वपूर्ण परियोजना में प्रशासनिक अड़चनों, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और पाकिस्तान की आपत्तियों के कारण करीब चार दशक तक देरी हुई। वर्ष 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद केंद्र सरकार ने इस परियोजना को गति देने पर जोर दिया।
चिनाब, झेलम और सिंधु उन पश्चिमी नदियों में शामिल हैं, जिनके पानी के सीमित उपयोग की अनुमति भारत को सिंधु जल संधि के तहत बिजली उत्पादन के लिए थी।
अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू करने से पहले परियोजना को सार्वजनिक निवेश बोर्ड (पीअाईबी) से मंजूरी और इसके बाद आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की स्वीकृति मिलना बाकी है।
