'क्या कड़ी शर्तों पर इंजीनियर रशीद को दी जा सकती है जमानत?', दिल्ली हाई कोर्ट ने NIA से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने एनआईए से पूछा है कि क्या आतंकी फंडिंग मामले में जेल में बंद बारामूला के सांसद ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने एनआईए से पूछा, क्या कड़ी शर्तों पर इंजीनियर रशीद को दी जा सकती है जमानत।
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने इंजीनियर रशीद की जमानत पर सवाल किया
एनआईए ने जमानत का विरोध किया, गवाह को प्रभावित करने का आरोप
सुनवाई 3 नवंबर तक स्थगित, रशीद 2019 से तिहाड़ जेल में
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली/श्रीनगर। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एनआईए से पूछा कि क्या आतंकी फंडिंग मामले में जेल में बंद बारामूला के सांसद इंजीनियर रशीद को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि इन शर्तों में उन्हें सिर्फ दिल्ली में रहने की शर्त शामिल होगी।
न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने एनआईए के अधिवक्ता को इस संबंध में निर्देश लेने की बात कहते हुए सुनवाई तीन नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
जमानत देने से इनकार करने के लिए ट्रायल कोर्ट के आदेश को इंजीनियर रशीद ने चुनौती दी है। गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत रशीद को गिरफ्तार किया गया था।
सुनवाई के दौरान जमानत याचिका का विरोध करते हुए एनआईए की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि रशीद के विरुद्ध काफी साक्ष्य हैं और इससे उन्हें राहत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक बार जब रशीद को जमानत मिली थी, तो उन्होंने एक गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
उन्होंने कहा कि इसे काल डेटा रिकॉर्ड से देखा जा सकता है। सिद्धार्थ लूथरा ने यह भी तर्क दिया कि रशीद पर लगे आरोप देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और एक आतंकवादी से संबंध रखने के हैं। एनआईए ने कहा कि मामले में दो गवाहों की गवाही बहुत महत्वपूर्ण है।
उक्त तथ्यों को देखते हुए पीठ ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख से पहले ट्रायल कोर्ट के सामने उनके बयान दर्ज किए जाएं। रशीद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। एनआईए ने रशीद को आतंकी फंडिंग से जुड़े यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था।
