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जम्मू-कश्मीर: डल झील की गुप्त गंगा पर हाई कोर्ट सख्त, सात दिन में दावों की सुनवाई; फिर हटेंगे अतिक्रमण

Published: Fri, 18 Sep 2026 06:52 AM (IST)

हाई कोर्ट ने डल झील को जीवन देने वाली ऐतिहासिक जलधारा शाहकुल (गुप्त गंगा) से अतिक्रमण हटाने के लिए डिवीजनल ...और पढ़ें

डल झील की गुप्त गंगा से अतिक्रमण हटाने का हाईकोर्ट का सख्त निर्देश।

डल झील की गुप्त गंगा से अतिक्रमण हटाने का हाईकोर्ट का सख्त निर्देश।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने डल झील की शाहकुल से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया।

  2. डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर अतिक्रमण हटाने के अभियान का समन्वय करेंगे।

  3. प्रभावित पक्ष सात दिन के भीतर अपने जमीन के दावे पेश करें।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। डल झील को जीवन देने वाली ऐतिहासिक जलधारा शाहकुल, जिसे गुप्त गंगा के नाम से भी जाना जाता है, को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अब प्रशासन को निर्णायक कदम उठाना होगा।

हाई कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपना डिवीजनल कमिश्नर, कश्मीर को अतिक्रमण हटाने के लिए नए सिरे से अभियान चलाने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान और न्यायमूर्ति राजनेश ओसवाल की खंडपीठ ने शाहकुल के जीर्णोद्धार की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि वह पिछले कई आदेशों के जरिए मामले की लगातार निगरानी कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

निशानदेही हुई, हटे नहीं अतिक्रमण

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने अतिक्रमणों की निशानदेही तो कर दी है, लेकिन उन्हें हटाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। जम्मू-कश्मीर झील संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने 22 जुलाई 2026 के आदेश के पालन में एक रिपोर्ट दाखिल कर शाहकुल की बहाली के लिए प्रस्तावित उपायों की जानकारी दी थी।

सुनवाई के दौरान कुछ निजी पक्षों ने जमीन पर अपने अधिकार का दावा करते हुए कहा कि बेदखली से पहले उन्हें सुना जाए। इस पर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता मोहसिन कादरी ने कहा कि सरकार कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शाहकुल को बहाल करने और अतिक्रमण हटाने के लिए प्रतिबद्ध है।

हाई कोर्ट ने दिया फैसला

हाई कोर्ट ने संतुलित फैसला देते हुए दो बड़े निर्देश दिए हैं। पहला डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर, जेएंडके एलसीएमए और अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर अतिक्रमण हटाने के अभियान का समन्वय करेंगे। इसके अलावा राजस्व प्राधिकरण के माध्यम से जमीन के अधिकारों से जुड़े सभी दावों की जांच की जाएगी।

अतिक्रमण हटाने से प्रभावित लोग 7 दिनों के भीतर अपना दावा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष पेश कर सकते हैं। दावा अवधि खत्म होते ही कानून के अनुसार अतिक्रमण हटाने और शाहकुल की बहाली का काम शुरू किया जाएगा।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को तय की है। अब सबकी नजरें प्रशासन पर हैं कि क्या इस बार डल झील की इस महत्वपूर्ण जलधारा को उसका पुराना स्वरूप मिल पाएगा।