Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    क्रास एलओसी व्यापार GST के अधीन, जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने POJK को जम्मू-कश्मीर का हिस्सा बताया 

    By Naveen Sharma Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Sat, 29 Nov 2025 05:05 PM (IST)

    जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने क्रास एलओसी ट्रेड को जीएसटी के दायरे में लाने का फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यह व्यापार वाणिज्यिक गतिविधियों का हिस्सा है। साथ ही, अदालत ने पीओजेके को जम्मू-कश्मीर का अभिन्न अंग बताया, जिससे इस क्षेत्र पर भारत के दावे को और मजबूती मिली है। 

    Hero Image

    जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय का यह फैसला व्यापार और क्षेत्रीय अखंडता के लिए महत्वपूर्ण है।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, जम्मू। बीते छह वर्ष से बंद पड़ा क्रास एलओसी ट्रेड पर कर माफ नहीं किया जा सकता, क्याेंकि यह दो मुल्कों के बीच नहीं बल्कि एक अंतरराज्यीय व्यापार है और गुलाम जम्मू कश्मीर कानूनी तौर पर पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का ही हिस्सा है। इसलिए क्रास एलओसी ट्रेड जीएसटी अधिनियम के तहत आएगा।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    यह व्यवस्था जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने क्रास एलओसी ट्रेड में शामिल उन व्यापारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दी है, जिन्होंने जीएसटी की अदायगी के संदर्भ में कर विभाग द्वारा उन्हें जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौति देते हुए कहा कि वह इसके दायरे में नहीं आते।

    अक्टूबर 2008 में शुरु किया गया था क्रास एलओसी व्यापार 

    आपको बता दें भारत-पाकिस्तान के बीच एक समझौते के तहत आपसी विश्वास बहाली के लिए जम्मू कश्मीर और गुलाम कश्मीर के बीच अक्टूबर 2008 में क्रास एलओसी व्यापार शुरु किया गया था। इस व्यापार के तहत सिर्फ बार्टर लेन-देन की अनुमति थी और उन्ही वस्तुओं का आयात निर्यात होता था जो जम्मू कश्मीर व गुलाम जम्मू कश्मीर में उत्पादित-निर्मित होती थी या फिर जिनकी अनुमति भारत-पाकिसतान सरकार ने दी थी।

    इस व्यापार की आड़ में जम्मू कश्मीर में आतंकी फंडिंग के मामले भी सामने आए और कई बार गुलाम कश्मीर से आने वाले ट्रकों में अवैध नशीला पदार्थ में बरामद किया गया। इस व्यापार को 14 फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के बाद बंद कर दिया गया। जब यह व्यापार शुरु किया गया था तो इसे कर मुक्त घोषित किया गया था।

    चुनौती देने वाली 35 याचिकाओं को खारिज किया

    जम्मू कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति संजीव कुमार और न्यायमूर्ति संजय परिवार एक डिवीजन बेंच ने वर्ष 2019 से ठप पड़े क्रास एलओसी ट्रेड के संबंध में जीएसटी अधिनियम के तहत जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली 35 याचिकाओं को खारिज किया है।

    पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मामले की पैरवी कर रहे वकीलोंने इस तथ्य को कोई चुनौति नहीं दी है और न उस पर कोई विवाद उठाया है कि जम्मू कश्मीर राज्य का इलाका जो अभी पाकिस्तान के असल नियंत्रण में है, में है, जम्मू कश्मीर राज्य का ही हिस्सा है।

    इसलिए, इस मामले में आपूर्तिकत्ता की भौगोलिक स्थिति और सामान की आपूर्ति के स्थान समय के जम्मू कश्मीर राज्य (अब केंद्र शासित प्रदेश ) में थी और इसलिए, कर क्रास एलआेसी व्यापार एक इंट्रा-स्टेट ट्रेड के अलावा और कुछ नहीं था।

    क्रॉस-एलओसी व्यापार को ज़ीरो-रेटेड बिक्री के रूप में माना था

    अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि संबधित कानून के तहत उपलब्ध असरदार उपायों को देखते हुए इस याचिका की सुनवाई की जरुरत नहीं है और याचिकाकर्ता को सीजएसीटी अधिनियम 2017 के तहत मौजूद कानूनी उपायों का सहारा लेने की सलाह है।

    याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखते हुए अदालत के पिटीशनर के वकील ने कहा कि इस्लामाबाद-उडी और रावलकोट (गुलाम जम्मू कश्मीर) से चक्कां-दा-बाग (पुंछ) तक का कारोबार, जैसा कि भारत और पाकिस्तान ने आपसी सहमति से तय किया था, एक बार्टर ट्रेड था, और इसमें कोई नकद या वित्तीय लेन देन नहीं हुआ था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उन्होंने क्रॉस-एलओसी व्यापार को ज़ीरो-रेटेड बिक्री के रूप में माना था, जिस पर कोई बिक्री कर नहीं लगता था।