'स्टेटहुड के लिए निरंतर प्रयासरत', CM उमर बोले- पूर्ण राज्य में होगा जनता की समस्याओं का समाधान
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे की बहाली के लिए निरंतर प्रयासों पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा मिलने से ही जम्मू-कश्मीर की जनता की समस्याओं का समाधान संभव है। साथ ही उन्होंने राज्य के विकास और जनहित के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करने की बात कही। बजट सत्र और जल संकट जैसे मुद्दों पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी राय रखी।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि मैं राज्य के दर्जे के लिए निरंतर प्रयासरत हूं, क्योंकि मैं जानता हूं कि यहां जनता को पेश आ रही कई समस्याओं का निदान केंद्र शासित प्रदेश में नहीं किया जा सकता।
निदान तभी होगा जब जम्मू कश्मीर एक पूर्ण राज्य होगा और राज्य सरकार के पास सभी अधिकार होंगे। मौजूदा समय में प्रदेश सरकार की अपनी सीमाएं हैं। जब तक राज्य का दर्जा नहीं मिलता, तब तक हम जनता के लिए उन सुविधाओं को सुनिश्चित बनाएंगे, जो केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था में रहते हुए मिल सकती हैं।
एक साथ करते रहेंगे दोनों काम
आज यहां एक समारोह के दौरान पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाली हमारी पहली प्राथमिकता है और इसके लिए हम हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम राज्य का दर्जा बहाल होने तक जनहित के मुद्दों को पीछे छोड़ दें।
हम दोनों काम एक साथ करते रहेंगे, जो काम हम केंद्र शासित प्रदेश में रहते हुए कर सकते हैं, प्रदेश की जनता के जीवन को बेहतर बनाने के लए जो सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं, वह करते रहेंगे और उसके साथ ही राज्य का दर्जा प्राप्त करने का प्रयास करते रहे हैं।
तीन मार्च को शुरू हो रहे बजट सत्र से संबंधी सवाल के जवाब को टालते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश सरकार का यह पहला बजट सत्र है। पहली बार हम बजट पेश करने जा रहे हैं और बजट को लेकर अभी कुछ कहना अनुचित होगा। सरकार की जिम्मेदारी पहले विधानसभा में बजट पेश करना है। इसलिए, मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा।
जो हासिल कर सकते हैं वो करेंगे
विपक्ष द्वारा चुनावी वादे पूरा न करने के लगाए जा रहे आरोपों को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोगों ने हमें पांच दिन के लिए नहीं पांच वर्ष के लिए चुना है। हमने अभी अपना पहला बजट भी पेश नहीं किया है। आपको इंतजार करना चाहिए।
हम जानते हैं कि हमने क्या वादे किये हैं और उन्हें कैसे पूरा करना है। मैंने पहले दिन से कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जो हम जो हासिल कर सकते हैं हम उन्हें हासिल करेंगे।
कश्मीर में सूखे सी स्थिति से उपजे हालात संबंधी सवाल के जवाब में उनहोंने कहा कि गर्मियों में जलसंकट की आशंका को हम अच्छी तरह से समझते हैं।हमारे यहां बारिश में करीब 80 प्रतिशत की की कमी रही है। जब बारिश या हिमपात कम होता है , तो इससे गर्मियों में पानी की कमी हो सकती है।
'पानी का सदुपयोग करें, व्यर्थ न गंवाएं'
इसलिए, मैंने कहा था कि हमें गर्मियों के महीनों के लिए तैयार रहने की जरूरत है क्योंकि सिर्फ कृषि कार्यों के लिए ही नहीं घरेलू उपयोग के लिए भी पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इस संकट से बचने और इससे निपटने के लिए हमें जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा।
आम लोगों को भी चाहिए कि वह पानी का सदुपयोग करें, इसे व्यर्थ न गंवाएं। सरकार को वर्षा जल संचयन और ग्लेशियरों को बचाने जैसे कदम उठाने की जरूरत है। जलसंकट की स्थिति में किसानों को सिंचाई के लिए कैसे पर्याप्त पानी मिले,इसके लिए हम जलशक्ति विभाग, सिंचाई विभाग और सभी संबधित पक्षों के साथ बातचीत कर कोई प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर उसे लागू करेंगे।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।