'वंदे मातरम' पर CM उमर का बड़ा बयान, कहा- कानून का पालन जरूरी; पसंद न हो तो कांग्रेस सत्ता में आकर बदल दे
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार को वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण से संबंधित मौजूदा कानून का पालन करना ...और पढ़ें
HighLights
सरकार को वंदे मातरम के मौजूदा कानून का पालन करना होगा।
यह कानून जम्मू-कश्मीर सहित पूरे देश में लागू है।
कांग्रेस सत्ता में आने पर संसद में कानून निरस्त कर सकती है।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को वंदे मातरम को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के पूर्ण संस्करण के गायन या वादन को लेकर जो कानून और वैधानिक प्रावधान मौजूदा समय में लागू हैं, सरकार को उनका पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में लागू है। यदि भविष्य में कांग्रेस सत्ता में आती है और इस कानून को समाप्त करना चाहती है तो वह संसद में इसे निरस्त कर सकती है।
श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार कानून से ऊपर नहीं है और जब तक संबंधित कानून अस्तित्व में है, उसका पालन करना उसकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा, 'हमें कानून का पालन करना होगा। अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह इस कानून को खत्म कर सकती है। लेकिन जब तक कानून मौजूद है, हमें उसका पालन करना होगा।'
वंदे मातरम के पूरे अंतरों को लेकर उमर ने कही बड़ी बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की मौजूदगी वाले सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान के साथ मौजूदा व्यवस्था के तहत वंदे मातरम के पूर्ण अंतरों का भी पालन करना होगा।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'अगर कांग्रेस सरकार आती है तो मैं दुआ करता हूं कि कांग्रेस सरकार जल्द से जल्द आए और संसद में इसे खत्म कर दे। उन्हें ऐसा करने दीजिए। हमें कोई आपत्ति नहीं है।'
नेकां का रुख नहीं बदला
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने कभी भी वंदे मातरम को पार्टी के रूप में स्वीकार नहीं किया है और भविष्य में भी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार के रूप में नेशनल कांफ्रेंस को मौजूदा कानून और वैधानिक प्रावधानों का पालन करना होगा।
उन्होंने दोहराया, 'हमें अपने कानूनी और वैधानिक दायित्वों को पूरा करना होगा।'
मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ है कि सरकार का रुख पार्टी के राजनीतिक दृष्टिकोण और सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारियों के बीच अंतर बनाए रखने का है। एक ओर नेकां वंदे मातरम को पार्टी के रूप में स्वीकार नहीं करती, वहीं दूसरी ओर सरकार में रहते हुए वह लागू कानून और वैधानिक प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य है।
