'कुछ किया होगा तभी लोगों ने उन्हें बार-बार वोट दिया...', PM मोदी को लेकर उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान
उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर उन्हें बधाई दी और उनके लगातार चुनावी सफलताओं की सराहना की।

उमर अब्दुल्ला और पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
HighLights
उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी को 25 साल पर बधाई दी
लगातार चुनावी जीत को बड़ी सफलता बताया
जम्मू-कश्मीर में वोटर लिस्ट के SIR पर जताई चिंता
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है।
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उमर ने प्रधानमंत्री को लेकर कहा कि पीएम मोदी के इस राजनीतिक सफर का आकलन करना मुश्किल है।
प्रधानमंत्री के राजनीतिक जीवन को बड़ी सफलता मानते हुए उन्होंने कहा कि पीएम ने जरूर कुछ ऐसा किया होगा जिससे लोग उन्हें वोट देते हैं। उमर अब्दुल्ला ने कहा,
उन्होंने (पीएम) जरूर कुछ ऐसा किया होगा कि लोगों ने उन्हें बार-बार वोट दिया। लगातार 25 साल तक चुनाव जीतना आसान नहीं है। पहले राज्य स्तर पर और फिर केंद्र स्तर पर। इसलिए, मैं अपनी और अपने सहयोगियों की ओर से उन्हें बधाई देना चाहता हूं।-उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री, जम्मू-कश्मीर
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इस तरह अब उन्हें सफल राजनीतिक जीवन में पूरे 25 साल पूरे हो गए हैं। वह मई, 2014 से भारत में पीएम के पद पर कार्यरत हैं।
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एसआईआर को लेकर क्या बोले उमर?
वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश में वोटर लिस्ट के प्रस्तावित 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) पर भी चिंता जताई।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया में दखल देने के लिए किया जा सकता है, जैसा कि देश के बाकी हिस्सों में हो रहा है।
श्रीनगर में मीडिया से बात करते हुए उमर ने कहा कि जिस तरह से देश के बाकी हिस्सों में चुनावों में दखल देने के लिए इसका (SIR) इस्तेमाल किया जा रहा है, वैसी ही संभावना है कि वे जम्मू-कश्मीर में भी ऐसा ही करेंगे।
यह आरोप लगाते हुए कि केंद्र शासित प्रदेश पहले ही इस तरह के दखल का शिकार हो चुका है। उमर ने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर में परिसीमन को नहीं भूले हैं। परिसीमन का मकसद बीजेपी को फायदा पहुंचाना था। एसआईआर के साथ भी ऐसा ही होगा।
विधानसभा चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर में विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन किया गया था, जिससे सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो गई थी। घाटी में सीटों की संख्या 46 से बढ़कर 47 हो गई, जबकि जम्मू क्षेत्र में यह 37 से बढ़कर 43 हो गई।
