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क्या सड़क के लिए हटेंगे सदियों पुराने चिनार? उमर के प्रस्ताव पर भड़कीं महबूबा, बोलीं- नए पौधों से नहीं होगी भरपाई

Published: Mon, 19 Oct 2026 01:11 PM (IST)

कश्मीर में सदियों पुराने चिनार के पेड़ों को सड़क जाम से निजात दिलाने के लिए हटाने के प्रस्ताव पर विवाद ...और पढ़ें

गांदरबल में जाम से निजात के लिए चिनार काटने की तैयारी। (फाइल फोटो)

गांदरबल में जाम से निजात के लिए चिनार काटने की तैयारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सदियों पुराने चिनार पेड़ों को हटाने पर विवाद।

  2. उमर अब्दुल्ला ने यातायात बाधा बताया।

  3. महबूबा मुफ्ती ने विरासत विनाश कहा।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर की पहचान माने जाने वाले सदियों पुराने चिनार के पेड़ों को बचाने और सड़क पर लगने वाले जाम से निजात दिलाने के बीच विवाद गहरा गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गांदरबल इलाके में सड़क किनारे खड़े पुराने चिनारों को यातायात में बाधा बताते हुए उन्हें हटाने की जरूरत जताई है। वहीं, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PD) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सदियों में तैयार होने वाली विरासत की भरपाई पौधे लगाकर नहीं की जा सकती।

महबूबा मुफ्ती ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि एक चिनार को अपनी पूरी भव्यता हासिल करने में कई पीढ़ियां लग जाती हैं। ऐसे में सदियों पुराने पेड़ों को काटकर उनकी जगह नए पौधे लगाने का तर्क विरासत के महत्व को कम करके आंकने जैसा है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर की पहचान बन चुके इन पेड़ों को किसी सामान्य पौधरोपण अभियान के जरिए प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। महबूबा ने इन चिनार के पड़ों को कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक धरोहर से भी जोड़ा।

चिनार के साथ तूश शॉल का भी उठाया मुद्दा

महबूबा ने उमर अब्दुल्ला के पुराने राजनीतिक कार्यकाल का जिक्र करते हुए कश्मीरी तूश शॉल से जुड़े विवाद को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान वाणिज्य मंत्री के रूप में उमर अब्दुल्ला का विश्वप्रसिद्ध कश्मीरी तूश शॉल पर लगे प्रतिबंध से संबंध रहा था।

महबूबा के मुताबिक, पहले कश्मीर की बुनाई से जुड़ी विरासत को नुकसान पहुंचा और अब उसकी प्राकृतिक विरासत पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर की परंपराओं और पहचान को एक-एक करके खत्म नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, तूश शॉल संबंधी आरोप और उसकी पृष्ठभूमि को स्वतंत्र रूप से परखना जरूरी है।

उमर अब्दुल्ला के सामने यातायात की चुनौती

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि बीहामा-खीर भवानी और गांदरबल सड़क मार्ग के कुछ हिस्सों में पुराने चिनार यातायात के लिए बड़ी बाधा बन रहे हैं। वाहनों की बढ़ती संख्या और आबादी के विस्तार के कारण इन मार्गों पर जाम की समस्या गंभीर हो रही है। उनका तर्क है कि सड़क के किनारे मौजूद पेड़ों के कारण यातायात सुचारु रखने के विकल्प सीमित हो गए हैं।

उमर ने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की परिवहन संबंधी परेशानियों को समझे बिना कई बार बाहर के लोग इस मुद्दे पर विरोध करते हैं।

आठ से दस नए चिनार लगाने का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने पुराने पेड़ों को हटाने की स्थिति में सुरक्षित वैकल्पिक स्थानों पर आठ से दस नए चिनार लगाने का प्रस्ताव रखा है। लेकिन पर्यावरण नीति समूह सहित पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने मांग की है कि पेड़ों की कटाई से पहले सड़क का वैकल्पिक मार्ग, डिजाइन में बदलाव और अन्य संभावनाएं तलाशनी चाहिए।

आपको बता दें कि कश्मीर के लिए यह केवल सड़क चौड़ी करने का मामला नहीं, बल्कि विकास, पर्यावरण और सदियों पुरानी विरासत के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी है।