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जम्मू-कश्मीर में LG के नाम से फर्जी चिट्ठी, नकली हस्ताक्षर से पुलिस पर 'हुक्म' चलाने की कोशिश; चार्जशीट दाखिल

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:32 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल के नाम से फर्जी चिट्ठी और नकली हस्ताक्षर का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा ने ...और पढ़ें

उपराज्यपाल के नाम से फर्जीवाड़ा, नकली हस्ताक्षर से SSP अनंतनाग को भेजा पत्र। (फाइल फोटो)

उपराज्यपाल के नाम से फर्जीवाड़ा, नकली हस्ताक्षर से SSP अनंतनाग को भेजा पत्र। (फाइल फोटो) 

HighLights

  1. उपराज्यपाल के नाम से फर्जी चिट्ठी का मामला सामने आया।

  2. नकली लेटरहेड और हस्ताक्षर से पुलिस को प्रभावित करने का प्रयास।

  3. आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में एक ऐसी चिट्ठी सामने आई, जिसने सरकारी तंत्र को भी चौंका दिया। चिट्ठी देखने में सरकारी थी, लेटरहेड आधिकारिक नजर आ रहा था और उस पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के कथित हस्ताक्षर भी थे। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो कहानी कुछ और निकली। आरोप है कि पूरा पत्र ही फर्जी तरीके से तैयार किया गया था और इसके जरिए अनंतनाग पुलिस प्रशासन को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

क्राइम ब्रांच कश्मीर की आर्थिक अपराध शाखा (इओडब्ल्यू) ने मामले की जांच पूरी करने के बाद पुलवामा के देरी निवासी सैकलैन मुश्ताक डार पुत्र मुश्ताक अहमद डार के खिलाफ श्रीनगर की सब-जज अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है।

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित फर्जी पत्र अनंतनाग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को संबोधित था। पत्र में भेजने वाले ने खुद को जम्मू-कश्मीर का उपराज्यपाल बताया। इसके लिए कथित तौर पर नकली सरकारी लेटरहेड और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया। यहीं से जांच का सिलसिला शुरू हुआ।

प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश

मामला केवल एक फर्जी दस्तावेज तैयार करने का नहीं था। एजेंसी के अनुसार, इस पत्र के पीछे कथित उद्देश्य अनंतनाग जिला पुलिस प्रशासन के कामकाज को प्रभावित करना था। यानी एक ऐसा पत्र तैयार किया गया, जिसे पहली नजर में संवैधानिक पद से जारी आधिकारिक निर्देश माना जा सकता था।

सरकारी पहचान का इस्तेमाल बना गंभीर पहलू

इओडब्ल्यू ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित अपराध सामने आए। इसके बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर अदालत में पेश की गई। अब इस मामले की अगली कड़ी अदालत में आगे बढ़ेगी। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।

किसी संवैधानिक पद के नाम, सरकारी लेटरहेड और हस्ताक्षर का कथित फर्जी इस्तेमाल महज कागज की नकल का मामला नहीं रह जाता। ऐसे दस्तावेज सरकारी अधिकारियों तक पहुंचकर प्रशासनिक फैसलों और प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से सरकारी पत्रों की प्रामाणिकता की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है।

किसी अधिकारी या संवैधानिक पद के नाम से आए संदिग्ध पत्र की स्थिति में संबंधित कार्यालय या विभाग से उसकी पुष्टि की जा सकती है।

फर्जी पत्र या हस्ताक्षर दिखें तो तुरंत एजेंसियों को दें सूचना

इओडब्ल्यू ने लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी के नाम से फर्जी पत्र, लेटरहेड, हस्ताक्षर या पहचान के दुरुपयोग का मामला सामने आता है तो इसकी सूचना संबंधित एजेंसियों को दी जाए।

जानकारी एसएसपी इओडब्ल्यू श्रीनगर (क्राइम ब्रांच) अब्दुल वहीद शाह को दी जा सकती है। इसके अलावा इओडब्ल्यू के आधिकारिक ईमेल sspeow-kmr@jkpolice.gov.in पर भी सूचना भेजी जा सकती है।