Photos: श्रीनगर के लाल चौक पर गूंजे मां दुर्गा के जयकारे, बंगाली समुदाय ने अबीर-गुलाल और ढोल-ढाक के साथ मनाया दुर्गोत्सव
श्रीनगर में बंगाली समुदाय ने लाल चौक से मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा निकालकर दुर्गोत्सव का समापन किया।

श्रीनगर में हुआ दुर्गाोत्वस (एजेंसी फोटो)
HighLights
लाल चौक से निकली मां दुर्गा की विसर्जन शोभायात्रा
बंगाली समुदाय ने अबीर-गुलाल और ढोल-ढाक से मनाया उत्सव
श्रीनगर में 2024 से मनाया जा रहा है यह दुर्गोत्सव
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर की वादियों में बुधवार को मां दुर्गा के जयघोष और अबीर-गुलाल ने दुर्गोत्सव को यादगार बना दिया। श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक स्थित घंटाघर से निकली मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा के साथ ही सर्वजनिन श्री श्री दुर्गोत्सव 2026 का समापन हो गया।

नाचते-गाते श्रद्धालु और अपनी परंपराओं के रंग में रंगे बंगाली समुदाय ने इस उत्सव को खास बनाया। झेलम नदी में प्रतिमा विसर्जन किया गया। इस उत्सव ने देश-विदेश से यहां आए पर्यटकों को धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सहभागिता का संदेश भी दिया।

आयोजन समिति के सदस्य सिद्धार्थ राय ने बताया कि श्रीनगर में दुर्गा पूजा धार्मिक अनुष्ठान से आगे बढ़कर घाटी में रहने वाले बंगाली समुदाय के लिए अपनी भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का अवसर भी है। यही वजह है कि घाटी में भी दुर्गोत्सव उसी आस्था व परंपरा के साथ मनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि उत्सव का शुभारंभ 17 अक्टूबर को श्रीनगर के गणिखान स्थित श्री सनातन प्रताप सभा परिसर में बंगाली स्वर्ण शिल्पी वृंदा की ओर से किया गया था।

पहले दिन कलश यात्रा और मां दुर्गा पूजा हुई, अगले दिन 18 अक्टूबर को रक्तदान शिविर, 19 को जवानों के लिए भंडारा और 20 अक्टूबर को दिनभर पूजा-अर्चना तथा प्रसाद वितरण किया गया।

स्वर्णाभूषण की दुकानों पर काम करने वाले सभी बंगाली कारीगरों की इसमें अहम भूमिका रही। वहीं, उत्सव में शामिल सुशांत घोषाल ने कहा कि श्रीनगर में वर्ष 2024 से बंगाल की परंपराओं के अनुरूप दुर्गोत्सव मनाया जा रहा है। ऐसे उत्सव कश्मीर की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं को सामने लाते हैं। लाल चौक से निकली विसर्जन यात्रा ने यह रेखांकित किया कि भौगोलिक दूरी और अलग परिस्थितियों के बावजूद समुदाय अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रख सकते हैं।
