नकली कैप्चा से हो जाएं सावधान! 'मैं रोबोट नहीं हूं' पर क्लिक करते ही खाली हो सकता है खाता; पुलिस ने किया अलर्ट
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इंटरनेट पर होने वाले नए साइबर हमलों, जैसे 'मैं रोबोट नहीं हूं' पॉप-अप और फर्जी सॉफ्टवेयर अपडेट के प्रति लोगों को आगाह किया है।

सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए नए हथकंडे अपना रहे साइबर अपराधी। सांकेतिक फोटो
HighLights
इंटरनेट पर 'मैं रोबोट नहीं हूं' संदेश से बचें।
फर्जी सॉफ्टवेयर अपडेट या कैप्चा पर क्लिक न करें।
संदिग्ध पॉप-अप या निर्देशों पर भरोसा न करें।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। इंटरनेट पर ब्राउजिंग करते समय अगर अचानक स्क्रीन पर ''''मैं एक रोबोट नहीं हूं'''' का संदेश आए, तो कोई भी ब्राउजर एरर ठीक करने के लिए बटन को ठीक करने या सुरक्षा के नाम पर सॉफ्टवेयर अपडेट करने का संकेत दे, तो सावधान हो जाएं। यह सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साइबर ठगों का जाल भी हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लोगों को ऐसे ही खतरनाक साइबर हमले के बारे में बताया है, जिसमें क्लिकफिक्स भी शामिल है।
पुलिस की चेतावनी का मुख्य संदेश साफ है कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाले हर संदेश और पॉप-अप पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। साइबर अपराधी अब लोगों को सीधे निशाना बनाने के बजाय उन्हें खुद ऐसी गतिविधि करने के लिए उकसाते हैं, जिससे उनके डिवाइस और ऑनलाइन सुरक्षा को खतरा पहुंच सकता है।
स्क्रीन पर नकली कैप्चा
क्लिकफिक्स हमले में अपराधी भरोसेमंद दिखने वाले संदेशों का सहारा लेते हैं। स्क्रीन पर नकली कैप्चा दिखाई दे सकता है, जिसमें उपयोगकर्ता से यह साबित करने को कहा जाता है कि वह इंसान है, रोबोट नहीं। इसके अलावा ब्राउजर में किसी समस्या का हवाला देकर उसे ठीक करने के लिए बटन दबाने या निर्देशों का पालन करने को कहा जा सकता है।
कुछ मामलों में फर्जी अकाउंट वेरिफिकेशन पेज सामने आते हैं, जबकि कहीं सुरक्षा अपडेट इंस्टॉल करने का संदेश दिया जाता है। इन संदेशों का मकसद उपयोगकर्ता को भ्रमित कर ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे उसके डिवाइस की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
एक गलती और डिवाइस की सुरक्षा पर खतरा
इस तरह के हमलों में साइबर अपराधी लोगों की जल्दबाजी और भरोसे का फायदा उठाते हैं। किसी वेबसाइट पर अचानक दिखने वाला अलर्ट असली लग सकता है, लेकिन उसके निर्देशों का पालन करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर किसी अनजान वेबसाइट या पॉप-अप की ओर से दिए गए कमांड को चलाना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
इसीलिए पुलिस ने लोगों को संदिग्ध संदेशों पर क्लिक करने, अनजान निर्देशों के अनुसार कमांड चलाने और बिना जांचे-परखे वेरिफिकेशन अनुरोधों पर प्रतिक्रिया देने से बचने की सलाह दी है। पुलिस ने लोगों से कहा है कि इंटरनेट पर किसी लिंक को खोलने या अचानक आए वेरिफिकेशन अनुरोध का जवाब देने से पहले सावधानी बरतें।
यदि कोई वेबसाइट किसी समस्या को ठीक करने, इंसान होने का प्रमाण देने या सुरक्षा अपडेट इंस्टॉल करने के नाम पर असामान्य निर्देश देती है, तो उसे गंभीरता से जांचना जरूरी है।
अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
