कब खत्म होगा इंतजार? झेलम पर 15 साल से अटके 4 पुल, जान जोखिम में डाल नाव से स्कूल जा रहे बच्चे; मरीज भी परेशान
उत्तरी कश्मीर के बांडीपोरा जिले के सुम्बल क्षेत्र में झेलम नदी पर पुलों के अभाव में हजारों लोग नावों से ...और पढ़ें

बांडीपोरा के सुम्बल में झेलम पर पुलों का 15 साल का इंतजार।
HighLights
सुम्बल में झेलम नदी पर पुलों का 15 साल से इंतजार।
हजारों लोग नावों से आवागमन को मजबूर, कई दुर्घटनाएं हुईं।
जेकेपीपी ने लंबित पुलों के तत्काल निर्माण की मांग की।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। उत्तरी कश्मीर स्थित बांडीपोरा जिले के सुम्बल क्षेत्र में झेलम नदी लोगों के लिए सुविधा के बजाय बड़ी परेशानी बन गई है। नदी के दोनों किनारों पर बसे गांवों के हजारों लोग आज भी सुरक्षित आवागमन के लिए पुलों का इंतजार कर रहे हैं। कहीं बच्चे नावों से स्कूल जाने को मजबूर हैं, तो कहीं अस्पताल पहुंचने के लिए मरीजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
बनियारी गांव झेलम नदी के कारण पूर्वी बनयारी और पश्चिमी बनयारी में बंट गया है। यहां के मछुआरे, रेत निकालने वाले मजदूर और बागवान लंबे समय से पुल बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों को 15 साल से अधिक समय पहले पुल का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक निर्माण नहीं हो सका।
नाव से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स पार्टी (जेकेपीपी) के प्रमुख शीबान अशाई ने बताया कि बनियारी, तुंडपोरा-हकबारा और अशम में पुलों का निर्माण डेढ़ दशक से अधर से लटके होने की वजह से स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांव का मिडिल स्कूल नदी के एक किनारे और हाई स्कूल दूसरे किनारे पर है। ऐसे में सैकड़ों बच्चों को रोजाना नाव से नदी पार करनी पड़ती है।
अशाई ने दावा किया कि इस दौरान कई लोगों की डूबने से जान भी जा चुकी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक बार अधिकारियों के दौरे के दौरान लोगों से भरी नाव पलट गई थी, जिसके बाद तत्कालीन उपायुक्त ने पुल बनाने के निर्देश दिए, लेकिन उसके बाद भी काम आगे नहीं बढ़ा।
सुम्बल के मुख्य बाजार को नेसबल, सफापोरा, नानिनार, हकबारा, तेंगपोरा और अशम जैसे इलाकों से जोड़ने वाला फुटब्रिज दरारें आने के बाद 2013 में तोड़ दिया गया था। अशाई के अनुसार, 2014 में परियोजना आवंटित होने के बावजूद पुल का काम आज तक पूरा नहीं हुआ। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
तुंडपोरा-हकबारा में 10 करोड़ की परियोजना पर सवाल
तुंडपोरा-हकबारा में भी स्कूली बच्चे नावों से झेलम पार कर रहे हैं। अशाई ने दावा किया कि 240 मीटर लंबे पुल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), जिसकी अनुमानित लागत 10 करोड़ रुपये से अधिक है, अब तक आगे नहीं बढ़ी है।
अशम के निवासियों की मांग है कि वहां मोटर योग्य पुल बनाया जाए ताकि आपात स्थिति में एंबुलेंस मरीजों को श्रीनगर के अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय करने को मजबूर न हो। अशाई ने 2024 की श्रीनगर नाव दुर्घटना का हवाला देते हुए कहा कि उस हादसे से सबक लिया जाना चाहिए था, लेकिन सुम्बल के लोग अब भी इसी खतरे के बीच जी रहे हैं।
चार जगहों पर पुल निर्माण जल्द शुरू करने की मांग
जेकेपीपी प्रमुख ने बनियारी में स्थायी पुल, सुम्बल बाजार में फुटब्रिज, तुंडपोरा-हकबारा में 240 मीटर के पुल को तत्काल मंजूरी और अशम में मोटर योग्य पुल का निर्माण जल्द शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसी और की जान नहीं जानी चाहिए।
सुम्बल के लोगों के लिए झेलम पर सुरक्षित आवागमन कोई विलासिता नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत है। पार्टी ने आश्वासन दिया कि सभी लंबित पुलों का निर्माण पूरा होने तक वह स्थानीय लोगों की आवाज उठाती रहेगी।
