श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर में सुधरते हालात और प्रशासनिक पाबंदियों को हटाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में तैनात अतिरिक्त केंद्रीय अर्धसैनिकबलों को हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। बीते एक माह के दौरान सीआरपीएफ और बीएसएफ के करीब दो हजार जवानों व अधिकारियों को राज्य से बाहर भेज दिया गया है, जबकि अगले 30 दिनों में तीन हजार और जवान हटाए जा रहे हैं।

पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को लागू करने से पहले केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में शांति व्यवस्था का माहौल बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए जुलाई के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय अर्धसैनिकबलों की अतिरिक्त टुकडि़यों की तैनाती शुरू की थी, जो चार अगस्त की रात तक चली।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ, एसएसबी, बीएसएफ, सीआइएसफ और आइटीबीपी समेत विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिकबलों के करीब 40 हजार जवान व अधिकारी जम्मू कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में तैनात किए थे। अब हालात में बेहतरी को देखते हुए केंद्रीय अर्धसैनिकबलों की अतिरिक्त टुकडि़यों को हटाकर उन्हें उनके तैनाती के मूल स्थानों पर या देश के उन हिस्सों में भेजना शुरू कर दिया गया है, जहां उनकी जरूरत है।

चरणबद्ध तरीके से चलेगी प्रक्रिया :

जम्मू कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हालात की लगातार समीक्षा की जा रही है। जहां-जहां हालात पूरी तरह से सामान्य हो चुके हैं और किसी तरह की अप्रिय घटना की आशंका नहीं हैं, वहां से केंद्रीय अर्धसैनिकबलों की अतिरिक्ति टुकडि़यों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चलेगी। पहले चरण में सीआरपीएफ और बीएसएफ के दो हजार जवानों व अधिकारियों को हटाया गया है। इनमें 16 कंपनियां या फिर बीएसएफ के 1600 जवान और अधिकारी हैं। चार अन्य कपंनियों में 400 जवान व अधिकारी सीआरपीएफ से संबंधित हैं।

दूसरे चरण में अधिकांश कश्मीर घाटी से हटाए जाएंगे जवान :

अधिकारी ने बताया कि दूसरे चरण में केंद्रीय अर्धसैनिकबलों की 30 कंपनियों अथवा तीन हजार जवानों को हटाया जा रहा है। पहले चरण में हटाए गए केंद्रीय अर्धसैनिकबलों में से अधिकांश जम्मू प्रांत के उच्चपर्वतीय इलाकों में तैनात किए गए थे। कश्मीर घाटी से करीब आठ कंपनियां हटाई गई हैं। दूसरे चरण में हटाई जा रही 30 कपंनियों में से अधिकांश कश्मीर घाटी से संबंधित हैं और इनमें से अधिकांश कश्मीर में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही हैं।

उन्होंने बताया कि किसी भी क्षेत्र में तैनात अर्धसैनिकबलों की अतिरिक्त टुकडि़यों को हटाने से पहले उस क्षेत्र की पूरी स्थिति की संबंधित अधिकारियों की बैठक में समीक्षा की जाती है। नागरिक प्रशासन की राय ली जाती है और विभिन्न सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट का आकलन किया जाता है। 

Posted By: Preeti jha

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