नवीन नवाज, श्रीनगर। पूर्वी लद्दाख और खासकर गलवन घाटी में तनाव कम होने की पुष्टि के बावजूद भारतीय सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चौकसी में कमी नहीं लाने जा रही है। अतीत से सबक लेते हुए सर्दियों में भी चौकसी का उच्च स्तर बनाए रखने की तैयारी शुरू कर दी है। शून्य से 50 डिग्री नीचे का तापमान हो या फिर बर्फीले तूफान हमारे जवान एलएसी के पास निगरानी चौकियों पर मुस्तैद रहेंगे। सर्दियों में जवानों को विपरीत हालात से बचाने के लिए सेना ने विशेष तंबुओं के अलावा सैन्य वर्दी व जूतों को खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) को यह ऑर्डर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय लद्दाख के मौसम के अनुरूप सैन्य साजोसामान की खरीद के लिए कुछ यूरोपीय देशों के भी संपर्क में है। प्रयास है कि सितंबर माह तक सामान सेना को उपलब्ध हो जाए।

सामान्य परिस्थितियों में सितंबर माह के अंत में एलएसी के अति दुर्गम इलाकों में भारत और चीन के सैनिक गश्त बंद कर देते हैं। कई अग्रिम निगरानी चौकियां भी पीछे हटा ली जाती हैं। सर्दियों में भीषण ठंड और बर्फीले तूफानों के कारण इन इलाकों में गश्त करना दुष्कर होता है। सैन्य सूत्र बताते हैं कि गलवन में कुछ जगहों पर भले ही चीन को कदम पीछे खींचने पर मजबूर होना पड़ा पर तनाव अभी समाप्त नहीं हुआ है। गतिरोध जारी है और अक्टूबर माह के अंत तक यही स्थिति कायम रहने की आशंका है। इसलिए अग्रिम इलाकों में तैनात जवानों के लिए लद्दाख की सíदयों के लिए आवश्यक साजोसामान चाहिए।

चीनी सैनिक सर्दियों में LAC का करते हैं उल्लंघन

उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ वर्षो के दौरान चीन की सेना द्वारा पूर्वी लद्दाख में एलएसी के अतिक्रमण की घटनाओं का अध्ययन किया है। चीनी सैनिक कई बार सर्दियों में भी एलएसी का उल्लंघन करते रहे हैं। इसके अलावा मौजूदा हालात में चीन के व्यवहार से अंदेशा बना हुआ है कि वह सíदयों में कोई नई साजिश रच सकता है। इसलिए रक्षा मंत्रालय ने सíदयों में एलएसी पर चीन से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में भारतीय सेना चौकसी और निगरानी के स्तर को सíदयों में कम नहीं करना चाहती है।

खून जमा देने वाली हवा है बड़ी चुनौती

लद्दाख में एलएसी से सटे ज्यादातर क्षेत्रों में सर्दियों में तापमान -25 से -40 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। कुछ स्थानों पर यह -50 डिग्री तक पहुंच जाता है। भारी बर्फ के बीच आगे बढ़ना नामुमकिन रहता है। इसके अलावा 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से नियमित बर्फीली हवाएं चलती रहती हैं। वहीं, बर्फीले तूफान आफत और बढ़ा देते हैं।

80 हजार जोड़ी ड्रेस चाहिएं

जवानों को इस विपरीत स्थिति में फिट रखने के लिए विशेष ड्रेस और तंबुओं की आवश्यकता है। इसीलिए ओएफबी को तिहरी परत के साथ ईसीसी (एक्सट्रीम कोल्ड क्लोदिंग) से बनी 80 हजार जोड़ी ड्रेस उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके साथ ही विपरीत हालात से बचाने वाले तंबू भी चाहिएं। एक अधिकारी ने बताया कि यह थ्री-लेयर ईसीसी सूट और जूते लद्दाख में तैनात जवानों के पास पहले से उपलब्ध वर्दी और जूतों से वजन में हल्के और ठंड को झेलने में ज्यादा कारगर हैं। 

राशन व ईंधन का पर्याप्त भंडार

उन्होंने बताया कि सेना ने सíदयों के लिए लद्दाख में ईधन व राशन का भंडार भी जमा करना शुरू कर दिया है। जम्मू से सड़क के रास्ते रोजाना 70-80 ट्रक करगिल व लेह के लिए पेट्रोल, डीजल, केरोसीन तेल, दालें, आटा व चावल लेकर जा रहे हैं। एक वरिष्ठ सैन्याधिकारी ने बताया कि लद्दाख में भारतीय सेना को सíदयों के लिए अपनी सारी तैयारी गíमयों में ही पूरी करनी होती है। चीनी सैनिक भी हमारी ही तरह पहाड़ों पर तैनात हैं, लेकिन उनकी चौकियों तक उनके वाहनों की आवाजाही सुगम है। तिब्बत तक उनका रेल नेटवर्क भी है।

Posted By: Dhyanendra Singh

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