जम्मू-कश्मीर में LoC के पास सेना का 'ऑपरेशन दृष्टि', 220 लोगों को मिली नई रोशनी; सेना प्रमुख धीरज सेठ भी पहुंचे
सेना ने नियंत्रण रेखा से सटे टंगधार इलाके में 'ऑपरेशन दृष्टि' के तहत दो दिवसीय मेगा आई सर्जिकल शिविर आयोजित ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में LoC के पास बसे 220 लोगों को मिली नई दृष्टि (जागरण फोटो)
HighLights
टंगधार में सेना ने 'ऑपरेशन दृष्टि' के तहत नेत्र शिविर लगाया।
भूमिगत ऑपरेशन थिएटर में 220 मरीजों की आंखों की सर्जरी हुई।
सेना प्रमुख धीरज सेठ ने शिविर का दौरा कर मरीजों से मुलाकात की।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। हमेशा संघर्षविराम के उल्लंघन और गोलाबारी के साए में रहने वाले नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे टंगधार इलाके में सेना लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने का काम कर रही है। सेना ने इलाके में भूमिगत ऑपरेशन थिएटर में ऑपरेशन दृष्टि के तहत दो दिवसीय शिविर में 220 मरीजों की आंखों की सर्जरी की।
इस मेगा आई सर्जिकल शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मोतियाबिंद के अलावा रेटिना और ग्लूकोमा से जुड़ी चुनिंदा जटिल सर्जरी भी कीं। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शुक्रवार को टंगधार में पहुंचकर शिविर का जायजा लिया और मरीजों से मुलाकात कर उनका हाल जाना।
टंगधार एलओसी पर वर्तमान में स्थिति शांत है, लेकिन क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए चिकित्सा शिविर के लिए भूमिगत ऑपरेशन थिएटर को प्राथमिकता दी गई।
आंखों की माइक्रोसर्जरी की गई
इसका उद्देश्य किसी आकस्मिक स्थिति में मरीजों, चिकित्सकों और चिकित्सा उपकरणों को सुरक्षित रखते हुए उपचार जारी रखने की क्षमता सुनिश्चित करना था। इसी सुरक्षित परिसर में अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से आंखों की माइक्रोसर्जरी की गई।
इस दौरान सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने अग्रिम क्षेत्र में पूर्व सैनिकों और वेटरन्स से भी मुलाकात कर उनकी स्वास्थ्य व कल्याण संबंधी आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने ऑपरेशन दृष्टि के तहत सीमावर्ती आबादी तक पहुंचाई जा रही चिकित्सा सेवाओं का जायजा लिया।
स्थानीय टीम के प्रयासों की सराहना की
शिविर का नेतृत्व दिल्ली कैंट स्थित सेना अस्पताल (रिसर्च एंड रेफरल) के नेत्र विज्ञान विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा ने किया। उनकी टीम ने दुर्गम पहाड़ी मार्गों से अत्याधुनिक फेकोइमल्सिफिकेशन, विट्रियारेटिनल और ग्लूकोमा सर्जरी से संबंधित उपकरण टंगधार तक पहुंचाए। डीजी एएफएमएस एयर मार्शल संदीप थरेजा ने भी शिविर का दौरा कर विशेषज्ञ सर्जनों तथा स्थानीय टीम के प्रयासों की सराहना की।
खावरपोरा, टंगधार, टाड, बगबेला, यांगदार और आसपास के गांवों के मरीज स्क्रीनिंग के बाद उपचार के लिए पहुंचे। रेडियो रूह-ए-करनाह के माध्यम से भी लोगों तक कैंप की जानकारी पहुंचाई गई।
सेना ने मरीजों के शिविर तक पहुंचने से लेकर उपचार और रिकवरी तक आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई। नेत्र शिविर में पहुंचे मरीजों में खावरपोरा के 87 वर्षीय गुलाम रबानी भी शामिल रहे।
मोतियाबिंद के कारण दृष्टि थी कमजोर
लंबे समय से मोतियाबिंद के कारण उनकी दृष्टि कमजोर थी और परिवार के सदस्यों को सपष्ट रूप से देखना मुश्किल हो गया था। सर्जरी के बाद उन्होंने अपने परिजनों को फिर से साफ देखा। इसी तरह टंगधार के 66 वर्षीय मोहम्मद यूनिस भी कमजोर दृष्टि के कारण रोजमर्रा के कामों में कठिनाई का सामना कर रहे थे। रेडियो पर कैंप की जानकारी मिलने के बाद वह उपचार के लिए पहुंचे। स्क्रीनिंग के दौरान करीब 400 मरीजों की मोतियाबिंद सर्जरी के लिए पहचान की गई थी।
