नवीन नवाज, श्रीनगर। अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ व पाक की बार्डर एक्शन टीम (बैट) की किसी भी नापाक हरकत से निपटने के लिए सेना और बीएसएफ अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हो रही है। अग्रिम इलाकों में जवानों को एंटीमाइन बूट, अत्याधुनिक नाइटविजन कैमरों, रेडियो सेट से लैस बुलेट प्रूफ पटका (हेलमेट) दिए जा रहे हैं। यह पटका न दुश्मन की दागी गोली के लिए अभेद्य होगा बल्कि तोपों और मोर्टार के गोलों के फटने से निकलने वाले छर्रे भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते।

आइबी-एलओसी की भौगोलिक परिस्थितियां कठिन

जम्मू-कश्मीर में पाक से सटी 202 किलोमीटर अंतरराष्ट्रीय सीमा और 776 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा है। आइबी-एलओसी की भौगोलिक परिस्थितियां अत्यंत दुर्गम व कठिन हैं जो घुसपैठियों व बैट दस्तों को भारतीय इलाके में घुसने में करती हैं।

अत्याधुनिक मेटल डिटेक्टर उपलब्ध कराए

रक्षा मंत्रालय से संबंधित अधिकारियों ने बताया कि आतंकियों की घुसपैठ कराने से लेकर सरहदी इलाकों में बैट कार्रवाईयों के लिए लगातार साजिशें जारी हैं। सेना और बीएसएफ ने घुसपैठरोधी तंत्र की समीक्षा करते हुए उसमें सुधार लाते हुए अग्रिम इलाकों में तैनात जवानों व अधिकारियों के साजो सामान को अत्याधुनिक बनाया है। अग्रिम इलाकों में बिछाई बारूदी सुरंगों का स्थान कई बार बारिश व हिमपात के दौरान बदल जाता है। गश्त के दौरान कई बार जवान चपेट में आ जाते हैं। अग्रिम इलाकों में जवानों को एंटीमाइन बूट के अलावा जमीन में दबाए विस्फोटक उपकरणों का पता लगाने वाले अत्याधुनिक मेटल डिटेक्टर उपलब्ध कराए गए हैं।

गोली भी भेद नहीं पाएगी पटके को

अग्रिम इलाकों में तैनात और आतंकरोधी अभियानों में शामिल जवानों व अधिकारियों को अत्याधुनिक सेंसरों और नाइट विजन डिवाइस से लैस बुलेट प्रूफ पटके भी दिए गए हैं। नए पटके व उसके साथ लैस एनवीडी व रेडियो सेट को एलओसी पर ऑपरेशनल गतिविधियों व स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते तैयार किया है। पहले जो एनवीडी और पटके उपलब्ध हैं, वह कारगर साबित नहीं हो पा रहे थे। पुराने एनवीडी रात के अंधेरे में एक समय विशेष या परिस्थिति में दुश्मन की हरकत को नहीं देख पाते थे। पटका भी तोप और मोर्टार के गोलों से निकलने वाले छर्रों से जवान के सिर को नहीं बचा पाता था। नए पटके जो अत्याधुनिक एनवीडी और सेंसर से लैस हैं, पूरी तरह सुरक्षित हैं। इन्हें कानपुर स्थित स्वेदशी कंपनी ने बनाया है। इन्हें जवानों व अधिकारियों की स्टैंडर्ड किट का हिस्सा बनाया है।

यह पटका जिसे बैलेस्टिक हेलमेट कहते हैं, पूरे सिर का बचाव करता है। इसे गोली नहीं भेद सकती। तोप, मोर्टार के गोले के फटने से निकलने वाले छर्रे और इन धमाकों के दौरान पैदा होने वाला कंपन भी हेलमेट को पार नहीं कर सकते। इसमें जो एनवीडी है,वह पूरी तरह अत्याधुनिक है। रात के अंधेरे में चाहे बारिश हो या हिमपात 300 मीटर की दूरी तक होने वाली हरकत को आसानी से देख सकती है। हेलमेट में रेडियो सेट है जिसके जरिए संबंधित जवान व अधिकारी वरिष्ठजनों से लगातार संपर्क में रहते हुए उनसे ऑपरेशन निर्देश प्राप्त करते हुए कार्रवाई को और मारक बनाने के अलावा उन्हें ग्राउंड सिचुएशन की रियल टाईम जानकारी भी दे सकते हैं।

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Posted By: Sachin Mishra

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