श्रीनगर, नवीन नवाज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त अमित शाह गृहमंत्री बन चुके हैं। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले शाह के लिए अब कश्मीर में अमन बहाली चुनौती होगा। अनुच्छेद 370 और 35 ए पर वह कौन सा कदम उठाएंगे इसे लेकर सभी की नजरें उन पर टिकी हैं। राजनेताओं से लेकर कश्मीर मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि शाह का असली इम्तिहान अब शुरू हुआ है।

शाह की अपने पूर्ववर्ती राजनाथ सिंह के साथ भी तुलना हो रही है। राजनाथ को उदारवादी और शाह को कट्टरवादी माना जाता है। शाह की राजनीतिक समझ पर विरोधियों से तालमेल बैठाने में उनकी कार्यकुशलता को लेकर कश्मीर में किसी को संदेह नहीं है।

शाह जमीन से उठकर राजनेता बने हैं:  इंजीनियर रशीद

अलगाववादियों की तर्ज पर कश्मीर में जनमत संग्रह की मांग करने वाले पूर्व निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने कहा कि शाह की छवि को लेकर यहां बहुत सी बातें होती हैं। एक बात आपको माननी पड़ेगी, वह जमीन से उठकर राजनेता बने हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि वह कश्मीरियों को इस मुसीबत से निजात दिलाएंगे। 370 भंग करने संबंधी मुद्दे पर रशीद ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान बहुत सी बातें की जाती हैं। वह भाजपाध्यक्ष नहीं हैं पूरे देश के गृहमंत्री हैं। वह यहां शांति और सामान्य स्थिति की बहाली के लिए कदम उठाएंगे।

पीडीपी का कहना शाह की छवि कट्टर नेता की

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने कहा कि शाह की छवि कट्टर नेता की है। हमें यह भी ध्यान में रखना होगा कि पीडीपी और भाजपा के जब गठजोड़ हुआ था तो वह उसकी शर्तों से अवगत थे। मोदी कई बार कह चुके हैं कि वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अधूरे कश्मीर मिशन को पूरा करेंगे। वह कश्मीरियों को गाली-गोली देने के बजाय उन्हें गले लगाकर कश्मीर मसला हल करने की इच्छा जता चुके हैं। उम्मीद है कि गृहमंत्री भाजपा की चुनावी सियासत के बजाय कश्मीर मसले को कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के दायरे में हल करने के लिए मोदी की तरफ से कश्मीर में बड़ी पहल का आगाज करेंगे। कश्मीर को हल करने के लिए कश्मीरियों के दिलों में जगह बनाने के लिए मोदी की तरफ से जिस शुरुआत का कश्मीरियों को इंतजार है, उसे शाह कर सकते हैं।

शाह को लेकर बड़ी उम्मीद पालना सही नहीं: फैसल

नौकरशाह से सियासतदान बने डॉ. शाह फैसल ने कहा कि हमें अभी से शाह को लेकर बड़ी उम्मीद पालने की जरूरत नहीं है। केंद्र से विभिन्न संस्थानों के आदर्शों और मूल्यों के संरक्षण की उम्मीद है। शाह को लेकर यहां किसी को डरने की जरूरत नहीं है। जब जिम्मेदारी आती है तो बहुत सी चीजें बदल जाती है। नेशनल कांफ्रेंस के महासचिव अली मोहम्मद सागर ने कहा कि शाह जम्मू कश्मीर को लेकर किस तरह का रवैया अपनाते हैं, इस पर अभी किसी तरह की टिप्पणी करना ठीक नहीं है। उनकी और मोदी की कैमिस्ट्री को देखकर हम उम्मीद कर सकते हैं कि वह कश्मीर में हालात सामान्य बनाने, कश्मीरियों को गले लगाने के मोदी के वादों और दावों को कश्मीर में जमीनी स्तर पर अमल मे लाने के लिए जरूर ठोस कदम उठाएंगे।

कश्मीरी पंडितों को भी हैं बहुत उम्मीदें

कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ डॉ. अजय चुरुंगु ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा आज शाह पर है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, अलगाववाद, कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के अलवा कई संवैधानिक मामलों पर उन्हें अब फैसले लेने हैं। रियासत के तीनों प्रांतों की सियासी-सामाजिक परिस्थितियां एक दूसरे से सर्वथा अलग हैं।

शाह की राजनीतिक सूझबूझ का असली इम्तिहान

लद्दाख में लोग अलग केंद्र शासित राज्य का दर्जा चाहते हैं। जम्मू में भी अलग राज्य की मांग पैदा हो चुकी है। 370 और 35ए का मुद्दा भी बड़ा है। जम्मू कश्मीर को जिहादी तत्वों की चंगुल से आजाद कराना और अतीत में केंद्र में सत्तासीन रही सरकारों ने कश्मीर के संदर्भ मे जो संवैधानिक गलतियां की हैं, कश्मीर केंद्रित सियासत के चलते जो गलत कदम उठाए हैं, उन सभी को ठीक करने की उम्मीद उनसे की जा रही है। उनकी जो छवि पांच वर्षो के दौरान बनी है उसे देखते हुए लोगों की उनसे यह उम्मीद बेमानी नहीं है। यहीं पर शाह की राजनीतिक सूझबूझ का असली इम्तिहान है।

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