राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल ने वीरवार को सभी सुरक्षा एजेंसियों को कश्मीर में हालात जल्द पूरी तरह सामान्य बनाने के लिए आतंकी व राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के अभियान तेज करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आम लोगों के जान-माल-सम्मान की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए भी कहा।

डोभाल ने यह निर्देश जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित राज्यों में परिवर्तित करने की कार्ययोजना और वादी में अलगाववादियों व आतंकियों द्वारा जबरन लागू कराए जा रहे बंद को नाकाम बनाने की रणनीति का एक उच्चस्तरीय बैठक में जायजा लेते हुए दिए। इसके बाद कश्मीर का दो दिवसीय दौरा पूरा कर डोभाल दिल्ली लौट गए।

27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा कश्मीर मुद्दा उछालने की आशंका से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कश्मीर दौरा बहुत अहम माना जा रहा है। यह दौरा उस समय हुआ है, जब सुरक्षा एजेंसियों ने कश्मीर समेत वादी के विभिन्न हिस्सों में जैश-ए-मोहम्मद द्वारा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के सहयोग से आतंकी हमले की साजिश का अलर्ट जारी कर रखा है।

पांच अगस्त के बाद डोभाल का यह दूसरा कश्मीर दौरा है। इससे पहले वह पिछले माह करीब 11 दिन कानून व्यवस्था के मद्देनजर कश्मीर में रहे थे। डोभाल दूसरे दौरे पर गत बुधवार श्रीनगर पहुंचने के बाद दक्षिण कश्मीर के अवंतीपोर गए थे। जहां उन्होंने पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों व जवानों के अलावा सेना के अधिकारियों से भी भेंट की थी।

एलओसी से अंदरूनी क्षेत्रों के हालात का लिया जायजा 

संबंधित अधिकारियों ने बताया कि डोभाल ने वीरवार को सेना, पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिकबल और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे बैठक की। इसमें जम्मू कश्मीर विशेषकर घाटी की मौजूदा स्थिति पर विचार विमर्श किया गया। उन्होंने एलओसी पर जारी गतिविधियों का भी जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से उनके कार्याधिकार क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर फीडबैक प्राप्त करते हुए हालात को जल्द से जल्द सामान्य बनाने की कार्ययोजना पर उनके सुझाव भी लिए। उन्होंने आतंकियों व अलगाववादियों द्वारा वादी में जबरन लागू कराए जा रहे बंद से निपटने की योजना का भी जायजा लिया और रणनीति बनाई।

अभियान में तेजी लाने के दिए निर्देश 

डोभाल ने जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन की प्रक्रिया के दौरान आतंकी व राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा खलल पैदा किए जाने की आशंका और आने वाले समय में जैश द्वारा बड़े हमलों की रची जा रही साजिश को नाकाम बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को विशेष दिशा निर्देश जारी किए। साथ ही नागरिक प्रशासन व सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों में व्यापक समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने वादी में सक्रिय आतंकियों, आतंकी संगठनों में नए लड़कों की भर्ती और घुसपैठ के प्रयासों से निपटने के लिए सुनियोजित अभियान चलाने के लिए भी कहा।

मोबाइल, इंटरनेट और राजनीतिक नेताओं की रिहाई पर भी चर्चा 

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने राज्य प्रशासन के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अलग बैठक की। उन्होंने वादी में मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवा की बहाली से जुड़े मुद्दों, सेब व्यापारियों से सीधी खरीद के लिए नेफेड द्वारा शुरू की गई मंडियों की मौजूदा स्थिति, 31 अक्तूबर को अस्तित्व में आ रहे दो केंद्र शासित राज्यों में प्रशासन व परिसंपत्तियों के बंटवारे की प्रक्रिया पर जारी काम का जायजा लिया। उन्होंने राज्य में निकट भविष्य में होने वाले ब्लॉक विकास परिषदों के चुनाव और एहतियातन हिरासत में लिए गए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की रिहाई से संबंधित मामलों पर भी विचार विमर्श किया है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन से पहले दौरा अहम 

कश्मीर मामलों के जानकार पत्रकार आसिफ कुरैशी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का यह दौरा 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन से पहले हुआ है। शुक्रवार को होने वाले इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का भी भाषण है। दोनों नेताओं के भाषण कश्मीर पर ही केंद्रित रहेंगे और इनका असर कश्मीर में जरूर होगा। इससे कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है और मौजूदा परिस्थितियों में कश्मीर में कानून व्यवस्था का संकट पाकिस्तान के हक में जाएगा। केंद्र सरकार कोई चूक नहीं चाहेगी और इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खुद कश्मीर में हालात को सामान्य बनाए रखने की रणनीति को अंतिम रूप देने यहां आए हैं।

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Posted By: Sachin Mishra

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