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कश्मीर में रेल विस्तार को बड़ा झटका, केंद्र ने बारामुला-उड़ी नई लाइन और काजीगुंड-बडगाम दोहरीकरण का प्रोजेक्ट लिया वापस

Published: Sun, 27 Sep 2026 12:03 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में बारामुला-उड़ी नई रेल लाइन और काजीगुंड-श्रीनगर-बडगाम रेल लाइन के दोहरीकरण की महत्वपूर्ण परियोजनाएं रद्द कर दी गई हैं। ...और पढ़ें

कश्मीर में रेल विस्तार को बड़ा झटका। फाइल फोटो

कश्मीर में रेल विस्तार को बड़ा झटका। फाइल फोटो


HighLights

  1. बारामुला-उड़ी नई रेल लाइन परियोजना वापस ली गई।

  2. काजीगुंड-बडगाम रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना भी रद्द।

  3. कैबिनेट सचिवालय ने प्रस्ताव लौटाए, अब विचार के लिए लंबित नहीं।

नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में रेल संपर्क को सीमावर्ती क्षेत्रों तक विस्तार देने और कश्मीर घाटी के मौजूदा रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की प्रस्तावित योजना को फिलहाल बड़ा झटका लगा है। रेल मंत्रालय ने बारामुला-उड़ी नई रेल लाइन और काजीगुंड-श्रीनगर-बडगाम रेल लाइन के दोहरीकरण की परियोजनाओं को वापस ले लिया है।

मंत्रालय के एक आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि दोनों प्रस्ताव कैबिनेट सचिवालय से वापस कर दिए गए हैं और अब विचाराधीन नहीं हैं।

रेल मंत्रालय ने उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक को भेजे पत्र में दोनों परियोजनाओं का स्पष्ट उल्लेख करते हुए कहा है कि ये प्रस्ताव कैबिनेट सचिवालय द्वारा लौटाए गए हैं और अब विचार के लिए लंबित नहीं हैं। पत्र की जानकारी मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण)/यूएसबीआरएल, उत्तरी रेलवे, जम्मू को भी भेजी गई है।

40 किलोमीटर की उड़ी रेल लाइन का क्या था उद्देश्य?

बारामुला-उड़ी रेल परियोजना करीब 40 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के रूप में प्रस्तावित थी। इसका उद्देश्य कश्मीर घाटी में मौजूदा रेल नेटवर्क को उड़ी तक आगे बढ़ाना था। उड़ी नियंत्रण रेखा के निकट स्थित महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

ऐसे में प्रस्तावित रेल लाइन को केवल यात्री सुविधा की परियोजना के बजाय सीमावर्ती क्षेत्र में कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों और रणनीतिक पहुंच के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

परियोजना के आगे बढ़ने से बारामुला और उड़ी के बीच सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने तथा स्थानीय लोगों और व्यापारियों के लिए तेज परिवहन विकल्प उपलब्ध होने की संभावना थी।

घाटी की मौजूदा रेल लाइन को दोगुना करने की योजना

दूसरी परियोजना काजीगुंड से श्रीनगर और बडगाम तक करीब 118 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के दोहरीकरण से जुड़ी थी। कश्मीर घाटी में रेल यात्रियों की संख्या और परिचालन क्षमता को देखते हुए दोहरीकरण का उद्देश्य मौजूदा कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना था।

एकल रेल लाइन पर ट्रेनों के संचालन में क्रॉसिंग और समय-सारिणी संबंधी सीमाएं रहती हैं। दोहरी लाइन बनने से दोनों दिशाओं में ट्रेनों के संचालन को अधिक सुगम बनाने की संभावना रहती है। इस परियोजना को विशेष रूप से घाटी में भविष्य की यात्री और माल ढुलाई आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

डीपीआर तैयार होने के बाद बदला घटनाक्रम

दोनों परियोजनाओं को लेकर यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे ने हाल में इनके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की थी। फरवरी में रेल मंत्रालय ने दोनों परियोजनाओं को कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्र में रेल संपर्क मजबूत करने की प्रस्तावित योजनाओं का हिस्सा बताया था।

हालांकि मंत्रालय ने उसी समय यह भी स्पष्ट किया था कि डीपीआर तैयार करना परियोजना की अंतिम प्रशासनिक या वित्तीय मंजूरी नहीं माना जाता। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित पक्षों से परामर्श, नीति आयोग और वित्त मंत्रालय समेत विभिन्न स्तरों पर मूल्यांकन तथा आवश्यक मंजूरियां जरूरी थीं।

जुलाई में मिली थी विशेष परियोजना की पहचान

दोनों परियोजनाओं के संबंध में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम जुलाई 2026 में सामने आया था। उपलब्ध राजपत्र संबंधी रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र ने इन्हें रेलवे अधिनियम के तहत विशेष रेलवे परियोजनाओं के रूप में अधिसूचित किया था।

इस पृष्ठभूमि में अब कैबिनेट सचिवालय द्वारा प्रस्ताव लौटाए जाने की सूचना ने इन परियोजनाओं की स्थिति को लेकर नया सवाल खड़ा कर दिया है।हालांकि मंत्रालय के पत्र में प्रस्ताव वापस किए जाने का विस्तृत कारण नहीं बताया गया है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों परियोजनाओं को स्थायी रूप से समाप्त किया गया है या भविष्य में संशोधित स्वरूप में इन्हें दोबारा विचार के लिए लाया जा सकता है।

अप्रैल के बयान से अलग है मौजूदा स्थिति

रेल परियोजनाओं को लेकर सरकार का रुख कुछ महीने पहले तक अलग था। अप्रैल 2026 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बारामुला-उड़ी रेल लाइन को योजना और डीपीआर चरण में बताया था। वहीं काजीगुंड से बारामुला के बीच दोहरीकरण कार्य को आगे बढ़ने की स्थिति में बताया गया था।अब रेल मंत्रालय के ताजा पत्र में दोनों प्रस्तावों को कैबिनेट सचिवालय से लौटाए जाने की पुष्टि की गई है।

विधानसभा में भी उठ चुका है सुरक्षा का मुद्दा

बारामुला-उड़ी रेल लाइन का प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी चर्चा का विषय बन चुका है। एक निजी सदस्य के प्रस्ताव में परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रस्तावित रेल मार्ग का स्वतंत्र भूगर्भीय, भू-तकनीकी और भूकंपीय अध्ययन कराने की मांग की गई थी।

कश्मीर का भूगोल, पहाड़ी इलाकों में निर्माण की जटिलता और भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसे आकलन किसी भी बड़े रेल प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

अब आगे क्या?

फिलहाल रेल मंत्रालय के पत्र से इतना स्पष्ट है कि बारामुला-उड़ी नई लाइन और काजीगुंड-श्रीनगर-बडगाम दोहरीकरण परियोजनाएं आगे की मंजूरी प्रक्रिया में नहीं हैं। लेकिन दोनों प्रस्तावों को वापस लेने के कारण और भविष्य में इनके संशोधित रूप में पुनर्विचार की संभावना पर आधिकारिक स्थिति अभी सामने नहीं आई है।

कश्मीर के लिए इन परियोजनाओं का महत्व केवल नई रेल लाइन बिछाने तक सीमित नहीं था। एक परियोजना घाटी के रेल नेटवर्क को सीमावर्ती उड़ी तक विस्तार देती, जबकि दूसरी मौजूदा नेटवर्क की परिचालन क्षमता बढ़ाने वाली थी।

यह दोनों परियोजनाएं कश्मीर घाटी में पर्यटन और अन्य कारोबारी गतिविधियों में एक नयी जान फूंकती और पूरे कश्मीर में आर्थिक-सामाजिक विकास एक नया कारण बनती।