राज्य ब्यूरो, जम्मू: जम्मू कश्मीर में जनजातीय शिक्षा योजना के तहत 200 स्कूलों को स्मार्ट स्कूलों में बदला जाएगा। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जनजातीय क्षेत्रों में बने इन स्कूलों को स्मार्ट बनाने की महत्वाकांक्षी योजना वीरवार को शुरू कर दी है। इस 40 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इन स्कूलों का आधुनिकीकरण दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 100 स्कूलों में अगले साल मार्च तक काम पूरा होगा। शेष 100 स्कूलों में काम भी अगले वर्ष दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। उपराज्यपाल ने गद्दी, सिप्पी, शीना समुदायों के 21 हजार बच्चों को छात्रवृत्ति देने के सरकार के एक और बड़े फैसले की घोषणा भी की है। पिछले तीन दशक से यह सुविधा विद्यार्थियों को नहीं मिल रही थी। उपराज्यपाल ने कहा कि साल 1991 में गद्दी, सिप्पी समुदाय को जनजातीय घोषित किया गया था, लेकिन उनके बच्चे छात्रवृत्ति से वंचित कर दिए गए थे। यह मामला कुछ दिन पहले ही उनके संज्ञान में लाया गया था। इसके बाद तुरंत फैसला किया कि गद्दी, सिप्पी, शीना समुदायों के 21 हजार बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। उपराज्यपाल के सलाहकार फारूक खान और मुख्य सचिव डा. अरुण कुमार मेहता ने आदिवासी बच्चों के लिए स्मार्ट स्कूलों के परिवर्तन को एक महान कदम बताया। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक सचिव बीके सिंह और जनजातीय मामलों के विभाग के प्रशासनिक सचिव डा. शाहिद इकबाल चौधरी ने आदिवासी समुदायों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति सराहनीय कदम बताया। स्मार्ट स्कूलों से वैज्ञानिक सोच पनपेगी

उपराज्यपाल ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में स्मार्ट स्कूल बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करेंगे और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेंगे। साथ ही स्कूल छोड़ने की दर को भी रोकेंगे। जनजातीय समुदाय के सदस्य, पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधि और स्वैच्छिक संगठनों से जुड़े लोगों को प्रबंधन में शामिल किया जाएगा ताकि ये स्कूल चेंजमेकर बन सकें। मजबूत शैक्षणिक तंत्र के लिए 104 करोड़ खर्च हो रहे

उपराज्यपाल ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और मजबूत शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के लिए लगभग 104 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जनजातीय विभाग के छात्रावासों के आधुनिकीकरण पर भी 8.50 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। नए छात्रावासों के निर्माण के लिए चार करोड़ रुपये दिए जाएंगे। जुलाई में प्रशासन ने फैसला किया था कि राजौरी में दो एकलव्य माडल स्कूल खोले जाएंगे जबकि अनंतनाग, पुंछ, कुलगाम और बांडीपोरा में एक-एक स्कूल खोला जाएगा। इसके लिए 21.25 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। 30 करोड़ रुपये स्कालरशिप के लिए दिए जा रहे हैं।

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