राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : राज्य पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि आतंकी संगठनों में इस साल स्थानीय युवकों की भर्ती में बहुत कमी आई है। बीते एक साल के दौरान बड़ी संख्या में गुमराह होकर आतंकी बने या फिर बनने जा रहे स्थानीय युवकों को भी मुख्यधारा में लाया है।

बुधवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष में लश्कर ए तैयबा के एक पाक आतंकी मोहम्मद वकार को मीडिया के समक्ष पेश करने के बाद कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों और आइजी सीआरपीएफ जुल्फिकार हसन की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि वर्ष-2018 सुरक्षा परिदृश्य से बहुत अच्छा रहा। बीते साल 272 आतंकी मारे गए। पथराव की घटनाएं भी कम हुर्ई। कानून व्यवस्था की स्थिति से लेकर आतंकरोधी अभियान बीते साल से अब तक हालात संतोषजनक रहे हैं और हमने कई सकारात्मक बदलाव महसूस किए हैं।

उन्होंने कहा कि यहां नाम नहीं ले सकता, फिर भी बता देता हूं कि हमने बहुत से युवकों को जो आतंकी बने थे या आतंकी बनने जा रहे थे, मुख्यधारा में लाए। इसमें संबंधित लड़कों के परिजनों और दोस्तों का पूरा सहयोग मिला।

एक सवाल के जवाब में पुलिस महानिदेशक ने कहा कि आतंकरोधी अभियान लगातार जारी हैं। आतंकी डर के मारे छिपे हुए हैं और ठिकानों से बाहर नहीं आ रहे, इसलिए बीते कुछ दिनों के दौरान सुरक्षाबालों व आतंकियों के बीच मुठभेड़ के मामले कम हुए हैं।

उन्होंने चुनाव के लिए राज्य में एक सुरक्षित और शांत वातावरण बनाए रखने के लिए सभी कदम उठाने का यकीन दिलाया। इसी के तहत मौजूदा चुनाव प्रक्रिया के दौरान आतंकियों को न सिर्फ कश्मीर में बल्कि जम्मू में भी किसी भी जगह सिर उठाने का मौका नहीं दिया।

जिहाद है या जहालत, लोग जरूर सवाल करें : सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने कहा वादी में हालात को पूरी तरह नियंत्रण में बताते हुए कहा कि आतंकी इस समय हताश हैं। वह मासूमों को निशाना बना रहे हैं। गत दिनों हाजिन में एक 12 वर्षीय बच्चे को भी आतंकियों ने अपनी जान बचाने के लिए पहले ढाल बनाया और फिर उसका गला रेत दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग आतंकवाद को जिहाद के नाम पर सही ठहराते हैं, वह आतंकियों व उनके समर्थकों से जरूर पूछें कि हाजिन में मासूम का निर्मम कत्ल जिहाद है या जहालत। यहां आम अवाम आतंकियों से तंग है और उनसे छुटकारा चाहती है।

Posted By: Jagran