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कैसे संवरेगा भविष्य? श्रीनगर में 19 सरकारी स्कूलों की अपनी छत तक नहीं, कुछ 1903 से किराए की इमारतों में चल रहे

Published: Thu, 01 Oct 2026 02:36 PM (IST)

श्रीनगर के ईदगाह निर्वाचन क्षेत्र में 19 सरकारी स्कूल अभी भी किराए की या अस्थायी इमारतों से संचालित हो रहे ...और पढ़ें

श्रीनगर के ईदगाह में किराए के मकानों में चल रहे 19 सरकारी स्कूल। (फाइल फोटो)

 श्रीनगर के ईदगाह में किराए के मकानों में चल रहे 19 सरकारी स्कूल। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ईदगाह में 19 सरकारी स्कूल किराए या अस्थायी जगहों से चल रहे।

  2. विधायक मुबारक गुल के सवाल पर सरकार ने विधानसभा में दी जानकारी।

  3. कुछ स्कूल 1903 से ही किराए की इमारतों से संचालित हो रहे हैं।

जागरण संवाददाता, श्रीनगर। प्रशासन लगातार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे कर रहा है, लेकिन श्रीनगर के ईदगाह विधानसभा क्षेत्र की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती है। यहां 19 स्कूल आज भी किराए की इमारतों, अस्थायी ठिकानों या दूसरी गैर-स्थायी जगहों से चल रहे हैं।

यह बात ईदगाह के विधायक मुबारक गुल द्वारा हाल में श्रीनगर में संपन्न हुए विधानसभा स्तर के दौरैन पूछे गए प्रश्न के दौरान सरकार ने खुद बताई।

गुल ने उन स्कूलों के बारे में जानकारी मांगी थी जो गैर-स्थायी इमारतों से चल रहे हैं, जिसमें उनकी जगह और वे कितने समय से ऐसी जगहों से चल रहे हैं, यह भी शामिल था।

कहीं 1903 से तो कहीं 1950 के दशक से किराए पर स्कूल

सरकार के जवाब के अनुसार, ईदगाह निर्वाचन क्षेत्र में 19 स्कूल अभी अस्थायी या किराए की गैर-स्थायी जगहों से चल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कुछ स्कूल तो 1930 और 1950 के दशक में अपनी स्थापना के समय से ही किराए की जगहों से चल रहे हैं।

इनमें गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल नरवारा (1903 से किराए की जगह से चल रहा है), बायज़ मिडिल स्कूल सफाकदल (1955), बायज़ हाई स्कूल गस्सी मोहल्ला (1965), बायज मिडिल स्कूल रथपोरा (1956) और बायज़ मिडिल स्कूल ईदगाह (1961 से किराए की जगह से चल रहा है) शामिल हैं।

श्रीनगर में ही नहीं, दूसरे जिलों में भी हाल खराब

हालांकि सरकार ने केवल एक विशेष निर्वाचण क्षेत्र में शिक्षा के ढांचे की वर्तमान सिथिति की जाकारी दी। हालांकि शहर में शिक्षा के ढांचे की तस्वीर इससे अलग नही है।

अभी भी अधिकांश स्कूल या तो जरजर इमारतों या फिर किराये के कमरों में बनाए गए हैं। जबकि घाटी के अन्य जिलों में शिक्षा का ढांचा इससे भी अधिक कमजोर है।