राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कौसरनाग यात्रा को पर्यावरण के लिए खतरा बताकर शनिवार को हुर्रियत के आह्वान पर कश्मीर बंद रहा, जिससे सामान्य जनजीवन लगभग ठप होकर रह गया। डाउन-टाउन के पांच थाना क्षेत्रों में निषेधाज्ञा से क‌र्फ्यू जैसी स्थिति रही। इस दौरान कुछ इलाकों में छिटपुट हिंसा भी हुई, लेकिन कमोबेश स्थिति शांत रही। प्रशासन ने अलगाववादी नेता मीरवाइज मौलवी उमर फारूक, सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह समेत सभी प्रमुख नेताओं को अपने घरों में नजरबंद रखा। इधर, जम्मू में यात्रा के समर्थन में प्रदर्शन हुए। कश्मीरी पंडितों व भाजपा सहित विभिन्न संगठनों ने सरकार की ओर से यात्रा की अनुमति रद किए जाने पर कड़ा एतराज जताया गया।

ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी की ओर से कौसरनाग यात्रा के खिलाफ बंद के एलान का असर सुबह से नजर आया। सभी प्रमुख व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल व निजी संस्थान बंद रहे। सड़कों पर वाहनों का आवागमन भी नाममात्र का रहा। हालांकि सरकारी कार्यालयों में अवकाश नहीं था, लेकिन बंद के चलते कर्मचारियों की नाममात्र उपस्थिति से कामकाज प्रभावित हुआ।

बंद के दौरान हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन ने श्रीनगर के पांच थाना क्षेत्रों महाराजगंज, रैनावारी, सफाकदल, नौहट्टा और खानयार में तड़के से ही निषेधाज्ञा को लागू कर दिया था। डाउन-टाउन में कई जगह पुलिस ने आने-जाने के रास्तों को कंटीली तारों से बंद कर रखा था। सभी संवेदनशील इलाकों में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान लगातार गश्त कर रहे थे। हालांकि सुबह डाउन-टाउन के कुछ हिस्सों में युवकों ने जुलूस निकालने का प्रयास करते हुए पुलिसकर्मियों पर पथराव किया था, लेकिन पुलिस ने उन्हें जल्द ही खदेड़ दिया। इसके अलावा बांडीपोर में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा हुई। बारामुला, सोपोर, पट्टन, बिजबिहाड़ा, कुलगाम, अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा, बड़गाम और त्राल में भी बंद ने अपना पूरा असर दिखाया।