जम्मू: LoC से सटे गांव की महिलाओं का कमाल, केक-कुकीज बनाकर बदली तकदीर; ऐसे बनीं आत्मनिर्भर
नियंत्रण रेखा के पास लाम गांव की महिलाओं ने बेकरी उत्पादों के माध्यम से आत्मनिर्भरता हासिल की है। सेना और ...और पढ़ें

एलओसी के पास चार महिलाओं ने बेकरी से बनाई पहचान।
HighLights
लाम गांव की चार महिलाओं ने बेकरी से आत्मनिर्भरता पाई।
सेना और असीम फाउंडेशन ने स्वरोजगार में मदद की।
स्थानीय बाजार से कच्चा माल खरीदकर उत्पाद बनाती हैं।
जागरण संवाददाता, राजौरी। नियंत्रण रेखा के नजदीक स्थित लाम गांव की चार महिलाओं ने बेकरी उत्पादों के जरिये आत्मनिर्भरता की राह बनाई है। पांच साल पहले शुरू हुई लाम बेकरी आज उनके लिए रोजगार, हुनर और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का माध्यम बन चुकी है।
सेना की लाम स्थित राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन ने असीम फाउंडेशन के सहयोग से इस इकाई की स्थापना स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से की थी।
घरेलू कामकाज से आगे बढ़कर अपने पैरों पर खड़ी हो रहीं महिलाएं
बेकरी में काम करने वाली सीमा देवी ने बताया कि शुरुआत में चार महिलाओं को इकाई चलाने के लिए चुना गया था। प्रशिक्षण के बाद अब वे पेशेवर तरीके से उत्पाद तैयार कर रही हैं। इससे पहले उनका अधिकतर समय घरेलू कामों में बीतता था, जबकि अब वे आमदनी अर्जित कर रही हैं।
आधुनिक मशीनरी से बनते हैं कुकीज, केक और ब्रेड
बेकरी से जुड़ी तरजिदर कौर के अनुसार, ज्यादातर कच्चा माल स्थानीय बाजार से खरीदा जाता है। खमीर जैसी कुछ सामग्री बाहर से मंगवानी पड़ती है। आवश्यक मशीनरी की मदद से यहां कुकीज, केक और ब्रेड सहित विभिन्न उत्पाद बनाए जाते हैं। गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
लाम से नौशहरा तक बाजारों में पहुंच रहे प्रोडक्ट्स
महिलाओं के बनाए उत्पाद लाम, लरोका, झंगड़, नौशहरा और राजौरी के बाजारों में बेचे जाते हैं। स्थानीय मांग उनके काम को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है।
यह पहल दिखाती है कि प्रशिक्षण और संसाधन मिलने पर सीमावर्ती गांवों की महिलाएं भी उद्यम के जरिये अपनी पहचान बना सकती हैं।
