जागरण संवाददाता, राजौरी : सीमावर्ती जिला राजौरी के 170 सरकारी स्कूलों को साफ-सफाई के बाद बुधवार को खोलने की अनुमति दे दी गई है। संबंधित अधिकारियों को आदेश का सख्ती के साथ पालन करने को कहा गया है। डीसी राजेश कुमार शवन ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों से कहा कि स्कूल, कालेज व पंचायत स्तर पर कोरोना का टेस्ट करवाने को विशेष शिविर लगाएं जाएं। कोरोना टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट आने पर ही विद्यार्थियों को स्कूल, कालेज आने की अनुमति दें।

डीसी ने कहा कि पहले सिर्फ 10वीं व 12 वीं कक्षा के सरकारी स्कूल के बच्चों को ही अनुमति मिलेगी। लापरवाही करने वाले संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी विद्यार्थी में कोरोना के लक्षण मिलते हैं तो बिना डाक्टर की अनुमति के ही बच्चे को अन्य बच्चों से अलग कर दें। उसको निगरानी में रखें, समय-समय पर उसकी जांच करते रहें।

डीसी ने कहा कि जिले के निजी स्कूल बंद रहेंगे। जब तक उनका शत-प्रतिशत कोरोना टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक स्कूल खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि निजी स्कूल व कालेज वाले लापरवाही भी बरत सकते हैं। अगर कोई निजी शिक्षण संस्थान खुला पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर स्कूल को हमेशा के लिए ताला लगा दिया जाएगा। ट्यूशन सेंटर चलाने वाले भी अगर लापरवाही करते पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। कोरोना की जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर व टीकाकरण करवाने वाले कालेज और यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों के लिए भी शिक्षा के सरकारी द्वार खोलने की तैयारी अभी से ही कर दें। सरकारी स्कूल-कालेज में साफ-सफाई के साथ पेयजल सप्लाई, बिजली व्यवस्था होनी चाहिए। डीसी ने कहा कि सरकारी स्कूल की जिस टंकी व शौचालय में पानी नहीं है, उसकी जानकारी लिखित में दें, ताकि लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाए। स्कूल-कालेज में एक दिन में 50 फीसद ही विद्यार्थी पढ़ाई के लिए हाजिर रहेंगे। स्कूल-कालेज के प्रिसिपल व जोनल शिक्षा आफिसर, जिला पंचायत अधिकारी व जिन अधिकारियों की ड्यूटी सौंपी गई है, अगर लापरवाही करते पाए जाएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

बैठक में एडीडीसी राजौरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कालेज के प्रिसिपल, जोनल व जिला शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायत, जिला सूचना अधिकारी व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बता दें कि कोरोना महामारी के चलते सरकारी व निजी शिक्षा संस्थानों के दरवाजे मौजूदा प्रशासन द्वारा स्कूली बच्चों व विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिए गए थे। पिछले दो वर्षो से कोरोना महामारी के डर से पढ़ाई से महरूम बच्चों का भविष्य अंधकार में था। जिम, स्पा, सिनेमा हाल, धार्मिक स्थल व सरकारी सभाओं, शादी आदि कार्यक्रम की अनुमति प्रशासन ने कुछ माह पहले ही जारी कर दी, लेकिन शिक्षण संस्थानों को खोलना उचित नहीं समझा जा रहा था। जम्मू कश्मीर के हर कोने से यही आवाज सुनने को मिल रही थी कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करते हुए सरकारी स्कूल-कालेज खोल दिए जाएं। अब प्रशासन नींद से जागा और कोरोना एसओपी का पालन करते हुए स्कूल खोलने की अनुमति दे दी है, जिससे स्कूल कालेज के विद्यार्थियों में खुशी देखने को मिल रही है। सरकारी स्कूल-कालेज के विद्यार्थियों ने कहा कि प्रशासन को स्कूल-कालेज बंद नहीं करने चाहिए थे। स्कूल-कालेज बंद रहने से व दिखावे की आनलाइन पढ़ाई से हमारी पढ़ाई पर बुरा असर पड़ा है। पढ़ाई से महरूम होने से हमारे अभिभावक गहरी चिता में हैं, जिन्हें अब सरकारी स्कूल कालेज खुलने की सूचना मिलने पर रहत मिली है।

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