संवाद सहयोगी, सुंदरबनी :

राज्य में पंचायती राज को मजबूत बनाने के लिए पंचायतों का गठन तो हो गया, लेकिन पंचायतों को जो अधिकार मिलने थे। वह आज तक नहीं मिल सके।

पंचायत कान्फ्रेंस जम्मू प्रांत के प्रधान चेयरमैन अरुण शर्मा ने सरकार के इस अभियान को ड्रामा करार देते हुए कहा कि सरकार पहले पिछले बैक टू विलेज कार्यक्रम का लेखा-जोखा आम जनता के सामने पेश करें।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल शासन द्वारा आज से कुछ महीने पहले भी बैक टू विलेज कार्यक्रम का आगाज बड़े जोर-शोर से किय ागया था। अधिकारियों ने घर-घर जाकर सरपंचों सहित लोगों की समस्याएं सुनी थी और एक रिपोर्ट तैयार करके उन्हें जल्द हल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं हो सका। ऐसे में एक बार फिर केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद उप-राज्यपाल द्वारा बैक टू विलेज कार्यक्रम दो का आगाज होने जा रहा । जिसको लेकर पंचायती नुमाइंदों में सरकार के प्रति गहरा रोष है।

बैक टू विलेज कार्यक्रम के दूसरे चरण शुरू होने को लेकर सुंदरबनी के सरकारी डाक बंगले में पंचायती नुमाइंदों द्वारा बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता बीडीसी चेयरमैन और ऑल पंचायत कान्फ्रेस जम्मू कश्मीर के उप चेयरमैन अरुण शर्मा ने की।

पंचों सरपंचों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि बैक टू विलेज कार्यक्रम के पहले चरण का कोई भी काम आज तक नहीं हो सका। इसको लेकर जनता और पंचायती नुमाइंदों में गहरा रोष है । पंचायती नुमाइंदों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार सिर्फ झूठे आश्वासनों से लोगों को लुभाने का काम करती है।

पंचायती नुमाइंदों ने कहा कि इस बैक टू विलेज प्रोग्राम में जो भी अधिकारी आएंगे उनसे पहले पूछा जाएगा कि पहले कार्यक्रम के तहत जो रिपोर्ट तैयार की गई थी उन कामों का क्या हुआ है।

अरुण शर्मा ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि ग्रामीण विकास विभाग ग्रामीण क्षेत्रों के मजदूरों का 800 करोड़ का बकाया जारी करे। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू के लिए यह जानना जरूरी है कि राज्य प्रशासन पंचायती राज संस्थानों के उम्मीद अनुसार काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा एक साल बीत जाने के बाद भी पंचायती राज को मजबूत बनाने की दिशा में कोई भी गंभीर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इससे विकास बाधित हो रहा है।

उन्होंने मांग करते हुए कहा कि एक टीम गठित की जाए जो हर एक जिला स्तर पिछले हुए बैक टू विलेज कार्यक्रम के तहत रिपोर्ट को जाने। आज तक उन कार्यों का क्या हुआ है। जिसे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होंने मांग की कि वहीं अधिकारियों को फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा जाएगा, जो बैक टू विलेज कार्यक्रम के पहले चरण में गांवो में जाकर लोगों की समस्याएं सुने थे। वादे पूरे न होने पर पंचों व सरपंचों के लिए लोगों के सवालों के जवाब देना मुश्किल हो रहे हैं।

वहीं अरुण शर्मा ने उप राज्य पाल शासन ओर जिला प्रशासन राजौरी से मांग करते हुए कहा कि एक महीने से ज्यादा समय होने के बाद भी उन्हें आज तक बैठने के लिए ऑफिस नहीं मिला है। अगर कुछ ही दिनों के अंदर ऑफिस नहीं मिलता तो वे सरकारी डाक बंगले में बैठ जाएंगे। इसके लिए जिम्मेदार जिला प्रशासन होगा।

इस बैठक में दर्जनों सरपंचों सहित काफी कसंख्या में पंच मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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