कम जमीन में बंपर कमाई का मौका, जम्मू-कश्मीर के किसान ऐसे करें मिर्च की खेती; जानें बुवाई से बिक्री तक का सही तरीका
पुंछ में छोटे किसान मिर्च की व्यावसायिक खेती से प्रति कनाल 45 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। कृषि विभाग ...और पढ़ें

पुंछ में एक कनाल मिर्च की खेती से 45 हजार रुपये तक की बिक्री की संभावना।
HighLights
एक कनाल मिर्च की खेती से 45 हजार रुपये की आय।
हरी मिर्च का बाजार भाव 150-200 रुपये प्रति किलो।
छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का सुनहरा अवसर।
जागरण संवाददाता, पुंछ। सीमावर्ती जिला पुंछ में छोटे किसान पारंपरिक खेती के साथ मिर्च का व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर अतिरिक्त आमदनी का अवसर तलाश सकते हैं। कृषि विभाग के अनुसार, एक कनाल भूमि पर मिर्च की खेती से करीब 2.5 से 3 क्विंटल उत्पादन और इसकी बिक्री से 40 से 45 हजार रुपये तक की राशि मिलने की संभावना है। फिलहाल बाजार में हरी मिर्च का भाव 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक बताया जा रहा है। हालांकि, यह संभावित बिक्री है, शुद्ध मुनाफा नहीं। वास्तविक कमाई उत्पादन, बाजार भाव, मौसम और खेती पर होने वाले खर्च पर निर्भर करेगी।
उपमंडल कृषि अधिकारी पुंछ तीरथ सिंह बलवाल ने किसानों को मिर्च की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि जिले में मिर्च उत्पादन और मसाला खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। किसान अपनी भूमि, स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार किस्म का चयन कर सकते हैं।
उचित बीज, सिंचाई, खाद और फसल प्रबंधन पर ध्यान देकर इस खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कम भूमि में अतिरिक्त आमदनी के लिए किसानों को खेती के वैकल्पिक तरीकों पर भी ध्यान देना चाहिए। कृषि विशेषज्ञों की सलाह और वैज्ञानिक तकनीक इसमें मददगार हो सकती है।
किसान मिर्च की बिक्री से बढ़ा सकते हैं आमदनी
फिलहाल पुंछ जिले के कई किसान मिर्च केवल घरेलू जरूरतों के लिए उगाते हैं। यदि वे जरूरत से अधिक उत्पादन बाजार में बेचने की योजना बनाएं, तो अतिरिक्त आय हासिल कर सकते हैं।
इसके लिए आसपास की मंडियों, दुकानदारों और अन्य खरीदारों से संपर्क करना उपयोगी रहेगा। फसल तैयार होने के समय बाजार भाव की जानकारी रखने से उपज के उचित मूल्य के लिए योजना बनाने में मदद मिलेगी।
लागत का हिसाब लगाकर शुरू करें खेती
एक कनाल में 2.5 से 3 क्विंटल उत्पादन और 40 से 45 हजार रुपये तक की संभावित बिक्री के आधार पर किसान खेती की योजना बना सकते हैं। लेकिन बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, कीट नियंत्रण और परिवहन का खर्च घटाने के बाद ही शुद्ध मुनाफे का आकलन किया जा सकता है।
किसान शुरुआत में एक या डेढ़ कनाल भूमि पर खेती कर उत्पादन, स्थानीय मांग और बिक्री का अनुभव हासिल कर सकते हैं। परिणाम अनुकूल रहने पर खेती का क्षेत्र धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
किस्म और फसल प्रबंधन का सही चुनाव जरूरी
तीरथ सिंह बलवाल के अनुसार, किसान हाइब्रिड, ओपन-पॉलिनेटेड और स्थानीय देसी किस्मों में से विकल्प चुन सकते हैं। चयन करते समय उत्पादन क्षमता, स्वाद, तीखापन, भूमि, जलवायु, सिंचाई सुविधा और बाजार की मांग को ध्यान में रखना चाहिए। खेती शुरू करने से पहले कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना जरूरी है।
कृषि विभाग से बीज चयन, फसल प्रबंधन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की जानकारी भी ली जा सकती है। समय पर सिंचाई, उचित पोषण, खरपतवार नियंत्रण, कीटों से बचाव और नियमित निगरानी से फसल को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।
उचित योजना और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर मिर्च की खेती छोटे किसानों के लिए अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकती है।
