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जम्मू में कार्रवाई, फिर कठुआ में रखे रोहिंग्याओं पर मेहरबानी क्यों? 5 साल में 264% बढ़ी संख्या

Published: Sun, 20 Sep 2026 07:00 AM (IST)

कठुआ के हीरानगर में रोहिंग्याओं की संख्या पांच साल में 78 से बढ़कर 284 हो गई, जिन पर हर साल ...और पढ़ें

हीरानगर में रोहिंग्याओं पर हर साल लाखों रुपये सरकारी खर्च हो रहा। (फाइल फोटो)

हीरानगर में रोहिंग्याओं पर हर साल लाखों रुपये सरकारी खर्च हो रहा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पांच साल में हीरानगर सेंटर में रोहिंग्या 78 से 284 हुए।

  2. सरकारी तंत्र से हर साल लाखों रुपये रखने पर खर्च।

  3. जम्मू में कार्रवाई के बावजूद हीरानगर रोहिंग्याओं पर कोई कदम नहीं।

अजय मीनिया, कठुआ। जम्मू से रोहिंग्याओं को हटाने के लिए प्रशासन की बड़ी कार्रवाई चल रही है। कई जगहों से बस्तियां हटा दी गई हैं, लेकिन कठुआ के हीरानगर होल्डिंग सेंटर में रखे गए रोहिंग्याओं को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पिछले 5 वर्ष से रखे गए रोहिंग्या सरकारी रोटियां तोड़ रहे हैं। जहां तक कि इनकी संख्या होल्डिंग सेंटर में भी लगातार बढ़ती जा रही है।

वर्ष 2021 में जम्मू के अलग अलग क्षेत्रों से 78 रोहिंग्याओं को उठाकर इस सेंटर में लाया गया। अब इनकी संख्या 284 हो चुकी है। जहां तक कि सेंटर में ही कई महिलाएं गर्भवती भी हुईं। कुछ महीने पहले सेंटर से एक गर्भवती महिला की जीएमसी कठुआ में डिलीवरी भी हुई।

अब सवाल उठता है कि यदि रोहिंग्याओं को जम्मू में खाली प्लाटों से हटाया जा रहा है, तो सरकारी तंत्र में पनाह लेकर बैठे हुए रोहिंग्याओं को बाहर क्यों नहीं किया जा रहा। जिन पर हर वर्ष लाखों रुपये सरकार की जेब से खर्च हो रहा है। रोहिंग्याओं को खतरा माना जा रहा है। दूसरी तरफ इन्हीं को सुरक्षा तंत्र में रखा गया है।

होल्डिंग सेंटर को अब तक नहीं मिला कोई आदेश

जानकारी के अनुसार होल्डिंग सेंटर में फिलहाल ऐसा कोई आदेश नहीं आया। जिसमें रोहिंग्याओं को कहीं भेजने या फिर इनके देश वापस भेजने की बात कही गई हो। सेंटर के अधीक्षक नियाज उल हसन का कहना है कि रोहिंग्याओं से संबंधित कोई भी निर्णय उच्च स्तर पर होना है। लेकिन उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, जिसमें की इनको कहीं भेजने या फिर वापस भेजने की बात की गई हो।

क्या बोले अधिकारी?

सूत्रों का कहना है कि केंद्र की ओर से इस सेंटर में रहने वाले रोहिंग्याओं की जानकारी जरूर मांगी गई है। जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व डीजीपी एस पी वैद का कहना है कि केंद्र सरकार को चाहिए कि इन रोहिंग्याओं को सेंटर से बाहर निकाल कर इनके देश भेजें। सरकारी तंत्र से अवैध रूप से रहने वालों पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करना समझ से बाहर है। यह लोग बाहर खतरा हैं तो सेंटर के भीतर भी सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

सेंटर में बवाल कूट चुके

बता दें कि रोहिंग्या सेंटर में कई बार बवाल कूट चुके हैं। शुरूआत में इनको रखे जाने पर इन लोगों ने खूब बवाल किया । जहां तक पथराव किया। बर्तनों को तोड़कर उनके चाकू बना लिए और सेंटर के स्टाफ पर हमला किया। वे आपस में भी कई बार भिड़ चुके हैं। अब भी यह लोग सेंटर के भीतर कई बार बवाल कूटने पर आ जाते हैं।