संवाद सहयोगी, बसोहली: विश्व विख्यात बसोहली का रामलीला का मंचन शनिवार देर शाम कोरोना एसओपी का पालन करते हुए शुरू हुआ। हालांकि, पहली बार रामलीला के मंचन को लेकर लोगों में उत्साह नहीं दिखा। बहुत कम लोग रामलीला का मंचन देखने घरों से बाहर निकले।

उधर, रामलीला के मंचन को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी अपनी ओर से सतर्क हो गया है। प्रशासन के निर्देश पर रामलीला मैदान में शिविर लगाकर कलाकारों का रैपिड जाच की गई, जिसके बाद ही कलाकारों को मंचन करने देने की अनुमति दी गई। सभी कलाकारों, जिसमें छोटे-छोटे बच्चों ने भी स्वैच्छा से रैपिड जाच करवाया। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद सभी पर उत्साहित दिखे। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर विनोद शर्मा ने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए जाच शिविर रोजाना लगाया जाएगा, ताकि लोगों को इसकी सुविधा मिल सके। इस दौरान करीब 31 कोरोना के सैंपल लिए गए और सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई।

उधर, पहले दिन के मंचन में पृथ्वी पर किए जा रहे राक्षसों के अत्याचार से बचाने के लिए भगवान से गुहार लगाई गई। देवी देवताओं ने बताया कि अब रावण के अंत के लिए जन्म लेना चाहिये। इस पर भगवान विष्णु ने जल्दी ही राम अवतार लेने की बात कही और सभी को उस घड़ी का इंतजार है, जब भगवान राम अवतार लेंगे। नन्हे बाल रूप में भगवान कई लीलाएं करेंगे, जिसे देखने के लिए हर कोई उतावला होने लगा।

राजा दशरथ के दरबार में किसानों ने गुहार लगाई कि हिंसक जानवरों के कारण खेतीबाड़ी करना मुश्किल हो गया है, लोग हिंसक जानवरों से तंग आ चुके हैं, इन्हें खदेड़ने अथवा मारने के लिए कोई उपाय किया जाये। राजा दशरथ खुद वन में गये और शिकार करने लगे। एक जगह पर उन्हें पानी के पास जानवरों द्वारा पानी पीने की आवाज आई तो उन्होंने शब्द भेदी वान चलाया, जिससे अंधे माता पिता के लिए पानी ले जा रहे श्रवण कुमार को वान लग गया। जैसे ही राजा दशरथ को हाय की आवाज आई तो वह यह सब देख कर सन्न रह गए कि उनका वान जानवरों की वजाय मनुष्य को लगा है।

श्रवण कुमार ने बताया कि वह अपने अंधे माता पिता को लेकर यहा से जा रहा था, माता पिता को प्यास लगी थी वह उन की प्यास बुझाने के लिए पानी लेने आया था। श्रवण कुमार के मर जाने पर राजा दशरथ खुद पानी पिलाने के लिए गए, मगर अंधे माता पिता को शका हुई कि यह हमारा पुत्र नहीं है। उन्होंने पूछा तो दशरथ ने सारा वृतात कह सुनाया, जिस पर उन्होंने दशरथ को श्राप दिया कि जिस प्रकार से वह अपने बच्चे के वियोग में मर रहे हैं, उसी प्रकार से दशरथ भी अपने बच्चों के वियोग में मरेगा। इसके बाद रावा बेदवती का संवाद हुआ, जिसमें रावण ने अनाथ स्त्री को पाने के लिये जी जान से कार्रवाई की, मगर बेदवती अपना सब कुछ भगवान विष्णु को अपर्ण कर चुकी थी, जब रावण ने उसे छुआ तो बेदवती ने श्राप दिया कि मैं जल्द ही पुन: सीता के रूप में जन्म लुंगी और तेरी मृत्यु का कारण बनुंगी, जिस प्रकार से इस जन्म में मेरी मृत्यु का कारण बना है। उसी समय बेदवती ने अपने आप को भस्म कर दिया। दशरथ का अभिनय सुरजीत चौहान, श्रवण कुमार विक्रात मिश्रा, बेदवती प्रवीण कुमार, रावण का अभिनय जितेंद्र सिंह ने निभाया।

बहरहाल, रामलीला मंचन के दौरान एसओपी का पूरी तरह से पालन किया गया। मैदान में आने जाने वाले हर व्यक्ति की स्कीनिंग की गई। सैनिटाइजर से हाथ साफ करवाए गए और दो गज की दूरी पर बैठने को कहा गया। इसके लिये युवाओं द्वारा मुख्य गेट पर भी सैनिटाइजर टनल लगाया गया था, बावजूद लोग घरों से रामलीला देखने के लिए नहीं के बराबर निकले।

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