संवाद सहयोगी, रामकोट : तेंदुए के शिकार बने पुरुषोत्तम के परिजनों व ग्रामीणों ने छलां चौक पर वन्य जीव विभाग व पुलिस प्रशासन के खिलाफ धरना लगाकर जमकर नारेबाजी की। ब्लाक डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरमैन अभय खजूरिया की अगुवाई में रामकोट के छलां चौक पर यातायात को भी अवरुद्ध कर दिया, जिसके कारण मार्ग के दोनों ओर सैकड़ों वाहनों की लंबी कतारें लग गई।

गौर हो कि बीते सोमवार की रात तेंदुए के हमले में मकवाल के वार्ड 9 चंबा बाग गुलगैड़ा निवासी नाबालिग पुरुषोत्तम कुमार पुत्र मोहिदर कुमार की मौत हो गई थी, जिसके बाद ग्रामीण रात को ही छलां चौक पर वन्य जीव विभाग के खिलाफ धरना लगाकर पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने, तेंदुए के आतंक को रोकने के लिए उन्हें मारने व धरपकड़ के आदेश जारी करने की मांग की। मौके पर पहुंचे वन्य जीव विभाग के कंजरवेटर के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हो गए थे। इस बीच सिविल कपड़े में मौजूद एक पुलिस कर्मी ने लाठी चला दी, जिससे लोग भड़क गए। इसके बाद मृतक के परिजन युवक का शव लेकर रामकोट आ गए और उसे सड़क के बीचोबीच रख कर पुलिस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करने लगे। पूरी तरह से शांत हो चुके प्रदर्शन के दोबारा भड़क जाने से मार्ग पर फिर से जाम के हालात बन गए।

हालांकि, मौके पर मौजूद एसडीपीओ रविद्र सिंह और एडीसी संदेश कुमार शर्मा ने लोगों को शांत कराने का काफी हद तक प्रयास किया, लेकिन लोग उनकी बात मानने को तैयार नहीं हुए। बाद में एडीसी बिलावर ने मृतक के परिवार को मुआवजा देने का आश्वासन दिया, जिसके बाद लोग शांत हुए और दोपहर 2 बजे के करीब सड़क को यातायात के लिए खोल दिया। कोट्स---

बिलावर प्रशासन मृतक के परिवार को 2 लाख मुआवजा देने के साथ प्रति माह रेड क्रास से एक हजार भी देगा।

-संदेश कुमार शर्मा, एडीसी, बिलावर कोट्स----

कानून के मुताबिक जंगली जानवर चाहे वो खूंखार भी हो, उसे विभाग मार नहीं सकता है। उसे सिर्फ ट्रैप कर सकता है, जहां पर इस तरह की समस्या के समाधान के लिए 15 दिन के भीतर ही ऐसे जानवरों को पकड़ने के लिए अभियान छेड़ा जाएगा। विभाग उसे 3 लाख रुपये मुआवजा देगा। स्थानीय लोग भी घरों से बाहर निकलते समय सतर्क हो कर निकले। अगर कहीं ऐसे जानवर मिल जाते हैं तो उनसे किस तरह से निपटना या बचना है, इसके लिए उन्हें खुद तैयार होना होगा, बाकी उनके विभाग का जो काम है,उसे जरूर किया जाएगा।

-एम के सिंह, कंजरवेटर, वाइल्ड लाइफ।

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मां-बाप की अकेला संतान था पुरुषोत्तम कुमार

अपने माता-पिता की अकेली संतान पुरुषोत्तम कुमार की मौत से उसके परिजनों का बुरा हाल है, मां बाप के लिए जीवन भर न भूलने वाली ये हृदय विदारक घटना याद कर सीने को तीर लगाती रहेगी। उनके जीने का मात्र सहारा पुरुषोत्तम कुमार था। वहीं चला गया तो जीने का मकसद ही खत्म हो गया। ताउम्र तक बेटे की दुखद मौत रुलाती रहेगी। इस दुखद मौत से जहां मां बाप का रो-रो कर बुरा हाल था, वहीं पूरे रामकोट क्षेत्र में भी शोक की लहर है। दोपहर के बाद गांव के श्मशान घाट में हुए उसके अंतिम संस्कार में काफी संख्या में लोगों ने हिस्सा लेकर उसे नम आंखों से विदाई दी। गत दिनों सांबा में सेना में भर्ती देख चुका था,लेकिन वहां पर फिजिकल टेस्ट में लंबाई कम होने पर रह गया था। बांसुरी बजाने का पुरुषोत्तम काफी शौकीन था। इससे उसकी अपने क्षेत्र में एक विशेष पहचान थी।

Posted By: Jagran

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