संवाद सहयोगी, रामकोट : आदमखोर तेंदुआ के पकड़े जाने के बावजूद ग्रामीण तेंदुए के आतंक से मुक्त नहीं हो पाए हैं। इसके कारण ग्रामीणों में अब भी दहशत का माहौल है।

दरअसल, मंगलवार की रात को भी ग्रामीणों ने वार्ड संख्या सात में एक तेंदुए के गुर्राने की आवाजे सुनीं। इस दौरान कोई अप्रिय घटना घटित तो नहीं हुई, ग्रामीणों में डर बना हुआ है कि अभी रामकोट कस्बे में ही कुछ और तेंदुए हो सकते है। हालांकि, पिछले करीब एक माह से क्षेत्र में डेरा लगाए बैठे वन्य जीव विभाग के कर्मचारियो को मंगलवार को कस्बे के वार्ड एक में एक तेंदुए को पकड़ने में सफलता मिली है। इस सब के बावजूद ग्रामीणों में अभी भी दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों का कहना है कि भले ही इतनी मशक्कत के बाद वन्य जीव विभाग के हत्थे एक तेंदुआ आ गया है, लेकिन पकड़े गए तेंदुए पर कोई ऐसी निशानी नहीं मिली, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह वही तेंदुआ है, जिसने 11 नवंबर की शाम के वक्त मकवाल के गुलगेड़ा बाग चम्बा में एक नाबालिग को काल का ग्रास बना लिया था। इसके कारण अभी तक यह साफ नही हो पाया है कि उनका इलाका आदमखोर तेंदुए के आतंक से मुक्त हो गया है।

ग्रामीण रामप्यारी व राज कुमार ने बताया कि तेंदुआ मोहल्ले के बीच से गुजरता हुआ तरोहटी के जंगल में लुप्त हो गया। क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि यह पता लगाना संभव नहीं है कि कौन सा तेंदुआ आदमखोर हो चुका है। पूरी रामकोट तहसील के लगभग सभी गांवों में जितने भी तेंदुए हैं, उनमें से कौन सा तेंदुआ कब उनकी ओर झपटा मारेगा इसका कोई पता नहीं है। इसके कारण लोगों में डर और दहशत बना हुआ है।

बहरहाल, अभी क्षेत्र में और भी तेंदुए होने के कारण लोगों को दहशत से छुटकारा नहीं मिला है, लेकिन वन्य जीव विभाग की टीम चप्पे 2 पर नजर रखे हुए है। बाक्स---कोट्स---

क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या का सही अंदाजा लगाना मुश्किल है। विभाग लगातार ग्रामीणों से मिल रही सूचनाओं के आधार पर तेंदुए को काबू करने के लिए प्रयास कर रहा है। सूचना पर जगह-जगह जाले लगाए जा रहे है। इसके अलावा लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि अगर तेंदुआ उन्हें दिखे तो वह अपनी सुरक्षा कैसे करें, साथ ही इसकी सूचना उनके साथ साझा करें।

- बिशंबर सिंह, रेंज अधिकारी, वन्य जीव विभाग।

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