संवाद सहयोगी, हीरानगर: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्रत्येक गांव में प्राइमरी स्कूल खोले थे, लेकिन बच्चों की कमी की वजह से हीरानगर शिक्षा जोन के 82 स्कूल में से 37 स्कूलों को बंद करके क्लब कर दिया गया है। इस वजह से बंद पड़ी प्राइमरी स्कूलों की इमारत आज देखरेख के अभाव में जर्जर हो रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि राज्य सरकार ने 29 विभागों की देखरेख का जिम्मा पंचायतों को सौंपे हुए है, लेकिन संबंधित विभागों के पंचायत में कार्यालय तक नहीं है। अगर शिक्षा विभाग बंद पड़ी हुई स्कूलों की इमारतों में विभिन्न सरकारी विभागों के क्षेत्रीय कार्यालय खोल दे तो लोगों को काम करवाने में काफी आसानी होगी। साथ ही इमारतों की देखरेख भी होती रहेगी।

क्षेत्र निवासी मनोहर लाल, सतपाल, दर्शन लाल, अश्विनी कुमार, संसार चंद, कालूराम का कहना है कि सरकार ने सभी गांवों में प्राइमरी स्कूल खोले थे, ताकि बच्चों को पढ़ने के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े। इस दौरान बच्चों को पढ़ाने के लिए रहबर ए तालीम के तहत गांवों के ही पढ़ें लिखे युवाओं को शिक्षक नियुक्त किया गया था, लेकिन आहिस्ता आहिस्ता स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होती गई। इसके कारण शिक्षा विभाग ने कुछ स्कूल को क्लब कर दिए। आज उक्त स्कूलों की इमारतें खाली पड़ी हुई है और जर्जर हालत में हैं। वहीं कृषि से जुड़े विभागों के पंचायतों में कार्यालय तक नहीं है।

ग्रामीणों को अपने जरूरी काम करवाने के लिए हीरानगर जाना पड़ता है। ऐसे में सरकार को उक्त बंद पड़े स्कूलों में विभागों के कार्यालय खोलने चाहिए, इससे लोगों को भी सुविधा मिलेगी तथा ईमारतों की देखरेख भी होती रहेगी। बीडीसी चेयरमैन रामलाल कालिया का कहना है कि जल्द ही सरपंच व पंचो के साथ विचार विमर्श कर एक प्रस्ताव डीसी को भेजा जाएगा, ताकि खाली पड़ी इमारतों को प्रयोग में लाया जा सके।

Posted By: Jagran

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