राकेश शर्मा, कठुआ : जिले में विगत कई वर्षाे से विभिन्न दरियाओं एवं नालों में जारी अवैध खनन के कारण जहां दरियाओं के आसपास रहने वाले लोग चितित हैं, वहीं खनन माफिया के लगातार बढ़ते हौसलों से अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने वालों के समक्ष चुनौती बनने लगा है। हालांकि, ऐसे हालात स्थानीय प्रशासन की शुरू से ही इस गंभीर मामले में प्रति दिखाई जा रही उदासीनता के कारण बने और बनते जा रहे हैं।

हैरानी इस बात को लेकर है कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन से अपना स्वरूप खो चुके रावी दरिया में अब भी अवैध खनन जारी है। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरे दरिया में ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट ने विगत दो साल से किसी भी तरह का खनन पर रोक लगा रखी है, इसके बावजूद रावी दरिया में बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी है। यह एक बड़ा सवाल है, जो प्रशासन के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।

तीन साल पूर्व तत्कालीन डीसी ने इस अवैध धंधे पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी, तब क्रशर भी बंद हो गए थे, अब वे अधिकारी जम्मू में डिवकाम है, हालांकि अगर वे चाहे तो अभी भी कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन अब ये मामला उनके सीधे अधिकार में न रहकर और भी कई अन्य जिम्मेदारियां लिए है, क्योंकि उनके लिए सिर्फ रावी दरिया ही नहीं, ब्लकि तवी और बसंतर आदि सैकड़ों नाले को भी देखना पड़ता है, वहां भी अवैध खनन से लोग परेशान है। इसके लिए जब सरकार ने खनन विभाग अलग से बनाकर रखा है तो उसकी सीधे जिम्मेदारी बनती है कि वे कोर्ट द्वारा लगाई गई अवैध खनन की रोक को सख्ती से लागू कराए, लेकिन विभाग में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों, जिनके लिए अवैध खनन ही मोटी कमाई का पिछले कई सालों से मुख्य जरिया बना है, वह कैसे इस पर कार्रवाई करेंगे, इसी के चलते उनके कार्यकाल में अवैध खनन और ज्यादा शुरू हो जाता है, विभाग भी ऐसे अधिकारियों को बार-बार तैनात करने में खनन माफिया के हाथ रहते हैं। इसी के चलते जिले के अब कुछ नालों के मात्र कुछ क्षेत्र में खनन विभाग ने ही अपनी मोटी कमाई का जरिया बनाने के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस जन सुनवाई शिविर लगाकर प्रयास में लगा है। हालांकि, ऐसी जन सुनवाई पर बिलावर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाते हुए भारी हंगामा भी किया। इसके बाद भी अधिकारी खनन माफिया को ही सिर्फ लाभ पहुंचाने के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस जन सुनवाई शिविर लगाने के प्रयास में लगे रहते हैं, ताकि कुछ एक दो किलोमीटर किसी नाले का क्षेत्र खनन की अनुमति मिले और उसकी आड़ में दूसरे में भी किया जाए, जहां अनुमति नहीं हैं।

यह भी बता दें कि रावी दरिया में भारी अवैध खनन के कारण हुई दरिया की भारी तबाही को देखते हुए ही पर्यावरण टीम के अधिकारियों द्वारा चार साल पहले यहां का दौरा करने के बाद कोर्ट ने पूर्ण खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। बाक्स----

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अवैध खनन का सबसे ज्यादा नुकसान किड़ियां गंडयाल में

रावी दरिया में जारी अवैध खनन के विपरीत प्रभाव का सबसे ज्यादा नुकसान किड़ियां गंडयाल वासी उठा रहे हैं। वहां के निवासी प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, वाटर लेवल नीचे चले जाने, कृषि क्षेत्र के खनन में समाने आदि की समस्या से जूझ रहे हैं। अब तो आवाज उठाने पर स्थानीय निवासियों को धमकियां दी जाती हैं। अवैध खनन के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे रावी रिवर एक्शन कमेटी के प्रधान महेंद्र शर्मा ने बताया कि वे कई बार प्रदर्शन करने के अलावा लिखित में प्रशासन को प्रतिबंध के बावजूद भारी अवैध खनन के सुबूत दे चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही उल्टा अब उन्हें खनन माफिया धमकियां देने लगा है। हालांकि, वे धमकियों से डरने वाले नहीं है, इसका भी जिला प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए। गत दिवस एंटी क्रप्शन ब्यूरो की जिला खनन विभाग में की गई छापेमारी से साफ है कि वहां क्या खेल चल रहा है। इसका भी सरकार संज्ञान ले। कोट्स----

जिला कठुआ में कहीं भी खनन की अनुमति नहीं है, कुछ क्षेत्र हो सकते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में जहां कुछ क्षेत्र में अनुमति है, वहां भी इस मौसम में कहीं भी खनन करने की अनुमति नहीं है। रावी दरिया में तो पूर्ण प्रतिबंध है। अगर वहां खनन हो रहा है तो इसके लिए जिम्मेदार जिला अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है, क्योंकि बरसात के मौसम में खनन बिल्कुल बंद होता है, इससे आसपास के क्षेत्र और को कई तरह का खतरा बन सकता है।

- ओ पी भगत, निदेशक, खनन विभाग ,जम्मू।

Edited By: Jagran