संवाद सहयोगी, हीरानगर : सरकारी जमीन खाली करवाए जाने की कार्रवाही शुरू होते ही सीमावर्ती किसानों ने एकजुटता दिखाकर विरोध करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में वीरवार को बार्डर वेलफेयर यूनियन के चेयरमैन रतन चंद, यूनियन के उपाध्यक्ष व सरपंच भारत भूषण की अगुआई में किसानों ने चकड़ा मुख्य चौक पर प्रदर्शन कर बेदखल किए जाने की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने की मांग की। साथ ही यूनियन सदस्यों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई तो शुक्रवार को सीमावर्ती किसान एसडीएम कार्यालय का घेराव करेंगे। जरूरत पड़ने पर सीमावर्ती क्षेत्र के किसान पलायन भी करेंगे।

सरपंच भारत भूषण का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र में 70 फीसद किसानों के पास सरकारी जमीन है जो राज्य की पूर्व सरकारों ने अलग-अलग कानून लागू कर मालकियत की जमीन उनसे निकाल कर सरकार की थी। उस पर उन्हीं किसानों का हक बनता है जो 60 वर्षो से संभालें हुए। 30 फीसद मालकियत की जमीन तारबंदी के आगे बीस वर्षो से खाली पड़ी है, जिस पर खेती नहीं हो रही और न ही सरकार उसका मुआवजा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन का मालिकाना हक पाने के लिए ही 2005 में किसानों ने आंदोलन चलाया था, जिसके बाद तत्कालीन सरकार रोशनी एक्ट के तहत मालिकाना हक देने की बात कही थी। अब रोशनी एक्ट के तहत शहरों में अगर धांधली हुई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए न कि किसानों पर जो पाकिस्तान की गोलीबारी का सामना कर खेती करते हैं।

उन्होंने कहा कि बॉर्डर यूनियन दो दिनों से किसानों को एकजुट कर रही है। शुक्रवार को पहले एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन करेंगे, उसके बाद आंदोलन के लिए आगे की रणनीति मौके पर तैयार की जाएगी। इस मौके पर किशोरी लाल, प्रेम नाथ, अश्वनी कुमार, सरदारी लाल, सन्नी माथुर, गोपाल दास, भगवान दास व बरियाम सिंह आदि मौजूद थे।

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