राकेश शर्मा, कठुआ : बढ़ती सर्दी में सरहद पार से आतंकियों के घुसपैठ की साजिशें शुरू हो जाती हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में कोहरा शुरू हो जाता है। इसी की आड़ में आतंकी घुसपैठ करने की कोशिशें करते हैं। ऐसे में सरहद से राष्ट्रीय राजमार्ग और भीड़भाड़ वाले महत्वपूर्ण संस्थानों में सुरक्षा बढ़ाने और मुस्तैदी की जरूरत है। देखा जा रहा है कि जिले में पुलिस नाकों, चौक चौराहों के अलावा सरहद से सटे लिंक मागरें में कोई सुरक्षा कर्मी नहीं दिखता। कहीं इस वीरानी का दुश्मन लाभ उठाकर नापाक घटनाओं को अंजाम देने में सफल न हो जाएं।

दरअसल, पड़ोसी राज्य पंजाब में इन दिनों में आतंकी साजिशें की घटनाएं बढ़ गई हैं। पंजाब से सटे होने के कारण जिला कठुआ पुलिस को भी अब सतर्क रहने की जरूरत है। जब कठुआ के लोगों से बात की तो अधिकाश ने कहा कि मौजूदा हालात में सुरक्षा प्रबंध कड़े होने चाहिए। दुश्मन इसी ताक में रहता है। राम नाटक सभा के प्रधान देवेंद्र सिंह व लखनपुर के रहने वाले साहिल कश्यप कहते हैं कि जरूरी नहीं है कि जब वारदात हो जाए, तब ही नाकों पर पुलिस की तैनाती की जाए। किसी ने सच ही कहा है कि सावधानी हटी दुर्घटना घटी, इससे पहले सार्वजनिक एवं भीड़ वाले चौक चौराहों एवं पुलिस नाकों पर वीरानी को हटाते हुए सुरक्षा मजबूत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पहले से ही ऐसी वारदातों के चलते संवेदनशील है। वैसे भी अगर दो दिन पहले पठानकोट सैन्य शिविर में ग्रेनेड फैंक कर भागे आतंकी क्या पता हो सकता है। अलग-अलग गुट में बंटे आतंकियों का भी हो सकता है। ऐसे में अगर पठानकोट में ग्रेनेड फेंकने के बाद जालंधर की तरफ भागे तो जम्मू कश्मीर में भी आ सकते थे। इस बीच पूर्व के वषरें में सर्दी के मौसम में हुई घुसपैठ की घटनाओं की तरफ भी ध्यान देने की जरुरत है। अक्सर आतंकी रात ठंडी होने और कोहरे के कारण सामान्य दिनों की तुलना में बाहरी क्षेत्र में गतिविधिया कम होने का लाभ लेने की ताक में रहते हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान जैसे देश पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता है, भले ही अब सीमा पर गत जनवरी माह से संघर्ष विराम लगाू हैं। इसके बाद भी ड्रोन की घटनाएं जो पहली घटी, जिला की सीमा से सटे बमियाल में दो सप्ताह पहले तरनाह नाले से संदिग्ध हालात में पाकिस्तान वोट मिलना आदि घटनाओं से समय रहते सबक लिया जा सकता है। सुरक्षा बलों को अब चौकस और सतर्क रहने की जरूरत है। हालाकि, कठुआ पुलिस अब जिला को उक्त मामले को लेकर पूरी तरह से सुरक्षित मानने लगी हो, ऐसा इसलिए कि जिस तरह से पहले शहर के कालीबड़ी चौक में 24 घटे वीपी वैन और 4 से 5 सिपाही 24 घंटे तैनात रहते थे। उसके बाद डीसी कार्यालय के बाहर और अंदर, शहीदी चौक, मुखर्जी चौक और जराई चौक, पारलीवंड बस अड्डे पर पुलिस के जवान तैनात रहते थे, उससे लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत होती है, लेकिन अब कुछ समय से ऐसा कुछ नहीं है। नाकों पर वीरानी छायी दिखती है, लेकिन अब माहौल देखकर सब कुछ राम भरोसे लग रहा है। पुलिस को अब बिना पल गवाए जिला में जगह -जगह सुरक्षा बढ़ानी होगी।

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