राज्य ब्यूरो, कठुआ : जम्मू संभाग के कठुआ के गांव रसाना में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में सोमवार से सुनवाई शुरू हुई। सभी आरोपितों ने कोर्ट के अंदर और बाहर चीख-चीख कर नार्को टेस्ट कराने की गुहार लगाई। सोमवार को आठ में से सात आरोपित जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट कठुआ में हाजिर हुए। आठवें नाबालिग आरोपित ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने जमानत याचिका दायर की। मामले की सुनवाई अब 28 अप्रैल को होगी, जबकि नाबालिग की जमानत याचिका पर सुनवाई 26 अप्रैल को होगी। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के पिता की याचिका पर मामले की सुनवाई कठुआ के बाहर चंडीगढ़ में कराने के आग्रह पर जम्मू-कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष कोर्ट ने पीड़िता के परिजनों और वकील को भी सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। पीड़िता के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच पर संतोष जताया। उन्होंने आरोपितों की सीबीआइ जांच की मांग का विरोध किया।

सोमवार को कठुआ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय गुप्ता की कोर्ट में जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, आरोपितों के पक्ष से हाईकोर्ट के वकील एके साहनी, असीम साहनी, अंकुर शर्मा ने कोर्ट में पेश चार्जशीट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चालान में कई प्रकार की खामियां हैं। इसे फिर से पेश किया जाना चाहिए। आरोपितों के वकीलों ने कहा कि उन्हें अभी तक चार्जशीट नहीं दी गई है। ऐसे में जब तक आरोपितों को चार्जशीट की प्रति नहीं दी जाती है, तब तक केस की सुनवाई कैसे होगी। आरोपित सिपाही तिलक राज के वकील एके साहनी ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा अदालत में आरोपियों को चार्जशीट की कापिया सौंपने की जानकारी देने पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कोर्ट इसका भी कड़ा संज्ञान ले कि कैसे निचली अदालत द्वारा उच्च अदालत को आरोपितों को चार्जशीट की कापिया सौंपने की जानकारी दी गई। इसकी भी सीबीआइ से जाच होनी चाहिए। बचाव पक्ष के वकीलों और सरकारी वकीलों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को तय की गई।

इस दौरान कोर्ट में मौजूद आरोपित साझी राम ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही नार्को टेस्ट कराने की भी माग की। करीब एक घटे तक चली सुनवाई के दौरान कोर्ट लोगों और मीडिया से खचाखच भरा हुआ था। कोर्ट के बाहर अन्य आरोपियों ने भी नार्को टेस्ट कराने की मांग की। इस दौरान सभी आठ आरोपित साझी राम, परवेश, विशाल शर्मा, सुरेंद्र वर्मा, दीपक खजूरिया, तिलक राज और आनंद दत्ता को कोर्ट में लाया गया था। सुनवाई के बाद उन्हें वापस कड़ी सुरक्षा में जेल ले जाया गया। गौरतलब है कि आठ अप्रैल को पेश क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के अनुसार, खानाबदोश समुदाय को योजनाबद्ध तरीके से क्षेत्र से हटाने के लिए दुष्कर्म और हत्या की साजिश रची गई। इस मामले में नाबालिग आरोपित के खिलाफ अलग से चार्जशीट पेश की गई है।

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90 दिन में सुनवाई मुश्किल :

कोर्ट में सुनवाई के बाद वकीलों ने कहा कि इस मामले में 490 पेज की चार्जशीट में 239 गवाह बनाए गए हैं। इनकी गवाही लेने के लिए काफी समय लगेगा। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट में 90 दिन में सुनवाई करना संभव नहीं है।

By Jagran