संवाद सहयोगी, बसोहली: तपती दुपहरी में सल्लन के ग्रामीण क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत करने में जुट जाते हैं, क्योंकि पिछले चार वर्षो से प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से तंग आ चुके हैं। इसके कारण अब ग्रामीण गांव की क्षतिग्रस्त नहर को स्वयं दुरुस्त करने का जिम्मा संभाल लिया। दो दिनों से ग्रामीण सुबह होते ही इकट्ठा होकर काम पर लग जाते हैं।

उप जिला की पंचायत द्रमण में करीब चार साल पहले प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत काम शुरू हुआ था। इस दौरान गांव को सिंचित करने वाली नहर एवं पानी की सप्लाई की पाइप लाइन चपेट में आ गई। चार साल से लोग सिंचाई के साधन एवं पीने के पानी की पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त हो जाने से परेशान रहे और इसके लिए कई बार पीएमजीएसवाई विभाग के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा सिंचाई व पीएचई विभाग के अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन किसी ने भी ग्रामीणों की परेशानी की और ध्यान नहीं दिया, जिस कारण हर बार गर्मियों में उनके पालतू माल मवेशियों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता था।

ग्रामीणों ने बताया कि घर में थोड़ी बहुत गुजारे के लिए साग सब्जी भी इस नहर के पानी से सिंचित खेतों में उगाई जाती रही, मगर नहर के क्षतिग्रस्त होने पर सब कुछ चौपट हो गया। कभी घर के द्वार पर महिलाएं कपड़े धोती और पानी की कई जरूरतें पूरा करती, मगर पिछले चार साल से यह सुविधा समाप्त होने पर किसी ने भी उनकी नहीं सुनीं, जिस कारण अब वे परेशान हो गये हैं। इस पाइप लाइन एवं नहर के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण गांव द्रमण, टिकरी, बरई, सल्लन, जलो गांव के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। पानी की कमी से परेशान सल्लान गांव के निवासियों ने स्वयं ही नहर को मरम्मत करने की ठानी है और हर रोज काम पर लग जाते हैं। तपती दोपहर में भी कोई थकता नहीं है। सोच है तो केवल गांव तक किसी प्रकार से पानी पहुंचे, ताकि कम से कम गर्मियां आसानी से निकल जाए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन एवं अधिकारी गांवों के लोगों की मुश्किल की और ध्यान नहीं देते हैं, हर बार फंड का अभाव या फिर प्लान की बात करते हैं जिससे लोग अब तंग आ चुके हैं।

Posted By: Jagran

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