जम्मू के हीरानगर में किसानों पर दोहरी मार, पहले खेतों में बिछ गई बासमती; अब दाने खराब होने का डर
जम्मू में भारी बारिश और तेज हवाओं से हीरानगर में बासमती धान की फसल खेतों में बिछ गई है, जिससे ...और पढ़ें

बारिश आंधी से खेतों में बिछी बासमती की फसल। फोटो- जागरण।
HighLights
बारिश से हीरानगर में बासमती धान की फसल बिछी।
खेतों में पानी जमा होने से कटाई में बाधा।
किसान सरकार से मुआवजे और सर्वे की मांग कर रहे।
जागरण संवाददाता, हीरानगर। जम्मू में पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद मौसम साफ हो गया है, लेकिन खेतों में बिछी बासमती की फसल किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। हीरानगर में बारिश और तेज हवाओं के कारण धान की फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में नमी और पानी जमा होने से कटाई का काम प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों को फसल खराब होने का डर सता रहा है। नुकसान की आशंका के बीच किसानों ने प्रशासन और सरकार से प्रभावित फसलों का आकलन करवाकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
कृषि विभाग हीरानगर के एसडीओ पुरुषोत्तम गुप्ता के अनुसार, उपमंडल में लगभग छह हजार हेक्टेयर भूमि पर बासमती धान की खेती की जाती है। बारिश से फसल को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए विभाग रिपोर्ट तैयार कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बासमती की कटाई अभी शुरू नहीं हुई है।
बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने और जमीन दलदली होने से कटाई में परेशानी आ रही है। फसल जमीन पर बिछ जाने से कटाई का काम भी मुश्किल हो गया है। खेतों में पर्याप्त नमी रहने के कारण कंबाइन मशीनों से कटाई करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मजदूरों की कमी से बढ़ेगी कटाई की लागत
वहीं, फसल की कटाई के लिए बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों की कमी भी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। किसानों का कहना है कि फसल गिरने के कारण हाथों से कटाई में अधिक मेहनत और समय लग सकता है। ऐसे में उपलब्ध मजदूरों की मांग बढ़ने से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
किसानों का कहना है कि यदि मौसम जल्द पूरी तरह साफ नहीं हुआ और खेतों से नमी कम नहीं हुई, तो जमीन पर पड़ी बासमती के दाने खराब हो सकते हैं या उनमें अंकुरण शुरू हो सकता है। इससे फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बारिश से बर्बाद फसल का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग
किसानों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि बारिश से प्रभावित खेतों का जल्द सर्वे करवाया जाए और फसल को हुए नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि फसल पर पूरे साल की मेहनत और लागत लगी होती है।
ऐसे में प्राकृतिक आपदा के कारण हुए नुकसान से उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने संबंधित विभागों से जल्द कार्रवाई कर राहत प्रदान करने की अपील की है।
अब किसानों को मौसम पूरी तरह साफ होने और खेतों से नमी कम होने के साथ ही बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों का इंतजार है, ताकि फसल की कटाई समय पर हो सके और नुकसान को कम किया जा सके। वहीं, कृषि विभाग द्वारा तैयार की जा रही नुकसान की रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
