छत से टपकता पानी, खिड़कियां टूटीं... 56 बच्चों की पढ़ाई 2 कमरों में, जम्मू-कश्मीर के इस सरकारी स्कूल का बुरा हाल
जम्मू-कश्मीर के हीरानगर के मॉडल मिडिल स्कूल में 56 विद्यार्थी जर्जर भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहाँ छतें ...और पढ़ें

हीरानगर के माडल मिडिल स्कूल के 9 कमरे असुरक्षित घोषित।
HighLights
हीरानगर मॉडल मिडिल स्कूल में 56 विद्यार्थी असुरक्षित भवनों में पढ़ रहे।
नौ कमरे असुरक्षित घोषित, केवल दो कमरों में चल रही पढ़ाई।
टपकती छतें, टूटी खिड़कियाँ; मरम्मत की अभिभावकों की मांग।
जागरण संवाददाता, हीरानगर। एक ओर सरकार की ओर से शिक्षा को बढ़ावा देने के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, दूसरी ओर कई स्कूल ऐसे हैं, जहां मूलभूत भवन और क्लास रूम तक सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में हमारे नौनिहालों का भविष्य कैसे संवरेगा। यह चिंता का विषय है। हीरानगर उपमंडल में भी कई सरकारी स्कूलों में भवनों की जर्जर हालत विद्यार्थियों की पढ़ाई में बाधा बन रही है।
कई स्कूलों के कमरों को विभाग की ओर से असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद बच्चों की कक्षाएं सीमित कमरों में संचालित की जा रही हैं। बारिश के दौरान कई कमरों की छतों से पानी टपकने और टूटी खिड़कियों के कारण विद्यार्थियों व शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
छतों से पानी टपकने की समस्या
जानकारी के अनुसार, कस्बे के माडल मिडिल स्कूल, हीरानगर में वर्तमान में करीब 56 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल के नौ कमरों की हालत जर्जर होने के चलते इन्हें असुरक्षित घोषित किया गया है। ऐसे में फिलहाल विद्यार्थियों की कक्षाएं केवल दो कमरों में संचालित की जा रही हैं।
एक-दो कमरों को छोड़कर अन्य की स्थिति खराब
इसी तरह मिडिल स्कूल, सन्याल और मिडिल स्कूल, नौं चक में भी एक-दो कमरों को छोड़कर अन्य कमरों की स्थिति खराब बताई जा रही है। कमरों की खिड़कियां टूट चुकी हैं और बारिश के दौरान छतों से पानी टपकने की समस्या भी सामने आती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पहले ही विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। पर्याप्त सुविधाएं और बेहतर आधारभूत ढांचा नहीं मिलने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिल करवाने को मजबूर हो रहे हैं। क्षेत्र में कई सरकारी स्कूलों को पहले ही क्लब किया जा चुका है।
ऐसे में यदि मौजूदा स्कूलों के भवनों की हालत भी नहीं सुधारी गई तो ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को और नुकसान हो सकता है।
शिक्षा विभाग से मांग
क्षेत्र निवासी प्रकाश चंद, अशोक कुमार, मनोहर लाल और दर्शन लाल ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि जर्जर स्कूल भवनों की जल्द मरम्मत करवाने के साथ विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कमरे, स्टाफ और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बेहतर होंगी तो ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावकों का इन स्कूलों के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा।
'दो कमरों का निर्माण जल्द'
हीरानगर जेडईओ अंजू देवी का कहना है कि माडल मिडिल स्कूल, हीरानगर के नौ कमरों को असुरक्षित घोषित किया गया है। इनमें से दो कमरों के निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है और टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। अन्य स्कूलों में चहारदीवारी और भवनों की मरम्मत सहित आवश्यक कार्यों के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं।
