जम्मू में किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, हीरानगर में बारिश से धान की फसल बिछी; भारी नुकसान की आशंका
हीरानगर उपमंडल में वीरवार को हुई दोबारा बारिश और तेज हवाओं ने धान की बची-खुची फसल को भी जमींदोज कर ...और पढ़ें

दोबारा बारिश से गंगू चक में जमींदोज हुई बासमती की फसल। फोटो- जागरण
HighLights
हीरानगर में दोबारा बारिश ने धान की बची फसल भी गिराई।
खेतों में जलभराव से कटाई प्रभावित, फसल खराब होने का डर।
किसानों ने सरकार से मुआवजे और केसीसी ऋण में राहत मांगी।
जागरण संवाददाता, हीरानगर। जम्मू के उपमंडल हीरानगर में बारिश का सिलसिला किसानों पर भारी पड़ रहा है। रविवार को हुई बारिश और तेज हवाओं से धान की फसल को नुकसान पहुंचने के बाद वीरवार सुबह हुई बारिश ने बची फसल को भी जमीन पर बिछा दिया। किसान अभी कटी हुई फसल को सुखाने और खेतों में जमा पानी की निकासी में जुटे हुए थे कि सुबह फिर से बारिश के साथ तेज हवाएं चलने लगी, जिससे जो बची हुई फसल खड़ी थी वो भी ढह गई।
खेतों में जलभराव के कारण कटाई का काम तो प्रभावित हो रहा है, जबकि गन्ने और सब्जियों की खेती पर भी संकट गहरा गया है। मढ़ीन, हीरानगर, हरिपुर, देवो चक, पानसर और चंगी पंचायतों के कई गांवों में खेतों से पानी नहीं निकलने के कारण किसान परेशान हैं।
फसल के खराब होने की आशंका बढ़ी
किसानों ने बताया कि रविवार को हुई बारिश और तेज हवाओं से धान की फसल जमीन पर बिछ गई थी। वीरवार सुबह दोबारा बारिश होने से खेतों में बची खड़ी फसल भी गिर गई। कई खेतों में पानी जमा होने से कटाई करना मुश्किल हो गया है।
किसानों का कहना है कि खेतों से पानी निकलने और जमीन सूखने में कई दिन लग सकते हैं। ऐसे में कटाई में देरी होने से फसल के खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
राहत प्रदान करने की मांग
किसानों के मुताबिक, धान की फसल तैयार करने के लिए बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी पर काफी खर्च किया गया है। अब फसल के जमीन पर बिछने और खेतों में जलभराव से उत्पादन प्रभावित होने का डर है। इससे किसानों के सामने लागत निकालने, परिवार का खर्च चलाने और अगली फसल की तैयारी करने की चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं, केसीसी ऋण की अदायगी को लेकर भी उनकी चिंता बढ़ गई है।
किसानों ने सरकार और प्रशासन से प्रभावित गांवों में जल्द सर्वे करवाकर नुकसान के अनुरूप मुआवजा देने तथा केसीसी ऋण में राहत प्रदान करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर सहायता नहीं मिली तो अगली फसल की बुआई के लिए खर्च जुटाना भी मुश्किल हो सकता है।
क्या बोले अधिकारी?
कृषि विभाग उपमंडल हीरानगर के एसडीओ पुरुषोत्तम गुप्ता ने बताया कि विभागीय टीमें प्रभावित गांवों का दौरा कर फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर रही हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। उन्होंने जलभराव वाले खेतों में पानी की निकासी के लिए नालियां बनाने की सलाह भी दी है।
