जम्मू: तोरी-सरसों की खेती से दोहरा फायदा, तेल के साथ चारे का इंतजाम भी; हीरानगर में 278 हेक्टेयर में लहलहा रही फसल
हीरानगर में किसानों का रुझान पारंपरिक फसलों से हटकर तिलहन की खेती की ओर बढ़ रहा है, जिससे लगभग 278 ...और पढ़ें

हीरानगर में तिलहन की खेती से किसानों को मिल रहा आर्थिक लाभ। (फाइल फोटो)
HighLights
हीरानगर में 278 हेक्टेयर भूमि पर तिलहन की खेती।
खाद्य तेलों की बढ़ती मांग ने किसानों का रुझान बढ़ाया।
तोरी की फसल कम समय में तैयार, किसानों के लिए लाभकारी।
जागरण संवाददाता, हीरानगर। उपमंडल हीरानगर के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों का रुझान अब पारंपरिक फसलों के साथ तिलहन की खेती की ओर भी बढ़ने लगा है। यही वजह है कि क्षेत्र में करीब 278 हेक्टेयर भूमि पर तोरी ,सरसों, की फसल लहलहा रही है। खेतों में खिले पीले फूल ग्रामीण क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाने के साथ किसानों की बदलती कृषि प्राथमिकताओं को भी दर्शा रहे हैं।
खाद्य तेलों की मांग और बाजार में उनकी कीमतों को देखते हुए किसान तिलहन की खेती को बेहतर विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। तोरी की फसल कम समय में तैयार होने और फसल चक्र में उपयोगी होने के कारण भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
तेल के साथ पशुचारे का भी इंतजाम
क्षेत्र के विभिन्न गांवों में इसकी खेती का विस्तार स्थानीय कृषि व्यवस्था में आ रहे बदलाव का संकेत है। क्षेत्र निवासी भगवान दास, पवन कुमार, मनोहर लाल, जनक राज का कहना है कि बाजार में खाद्य किमतो में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में किसानों के लिए तोरी की खेती आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। सरसों के बीज से तेल प्राप्त होता है और इसकी खली पशुचारे के रूप में भी उपयोगी होती है।
वहीं, फसल चक्र में तिलहन को शामिल करने से भूमि के बेहतर उपयोग में मदद मिलती है। हालांकि, किसानों को फसल से अच्छा मुनाफा मिलने के लिए उचित बाजार भाव और उपज की समय पर बिक्री की सुविधा मिलना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले किसान तोरी सरसों दलहन की फसलें कम लगाने लगे थे, लेकिन अब पारंपारिक फसलों में दलहन तिलहन की जरूरत भी बढ़ने लगी है। दूसरा तोरी के बाद उन्हीं खेतों में गेहूं की बुआई भी हो सकती है।
278 हेक्टेयर भूमि पर लहलहा रही तोरी-सरसों
इन दिनों खेतों में दूर तक फैले पीले फूल लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। करीब 300 हेक्टेयर भूमि पर लहलहाती तोरी की फसल क्षेत्र में तिलहन उत्पादन की संभावनाओं को उजागर कर रही है। यदि किसानों को उन्नत बीज, कृषि विशेषज्ञों की सलाह और उपज के उचित दाम मिलते हैं, तो आने वाले समय में इस खेती का दायरा और बढ़ सकता है।
इस संबंध में कृषि विभाग उप मंडल हीरानगर के पुरषोत्तम गुप्ता का कहना है कि किसानों का रूझान तोरी सरसों की खेती की तरफ बढ़ा है।उप मंडल के हीरानगर, मढीन जोन में लगभग 278 हेक्टेयर भूमि पर तोरी लगी हुई है। विभाग की तरफ से तोरी सरसों के बीज भी उपलब्ध कराए गए थे।
