ये कैसा विकास? कठुआ की शाहरा-माश्का सड़क दो महीने से बंद, बीमार महिला को पालकी में 8 km ले जाना पड़ा
कठुआ की शाहरा-माश्का सड़क करीब दो महीने से बंद होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी हो रही है, जिससे ...और पढ़ें

सड़क बंद होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।
HighLights
शाहरा-माश्का सड़क दो महीने से बंद, ग्रामीण परेशान।
बीमार महिला को 8 किमी पालकी में पहुंचाया गया।
विभाग और ठेकेदार की निष्क्रियता पर ग्रामीणों में रोष।
जागरण संवाददाता, बसोहली। विकास के दावों के बीच शाहरा-माश्का सड़क की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब दो माह से सड़क बंद होने के कारण क्षेत्र के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि गांव सलोवा की करीब 50 वर्षीय एक बीमार महिला को ग्रामीणों ने लगभग आठ किलोमीटर तक पालकी के सहारे सड़क तक पहुंचाया।
ग्रामीणों के अनुसार महिला के बीमार होने के बाद उसे उपचार के लिए सड़क तक लाना जरूरी था, लेकिन सड़क बंद होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।
ऐसे में ग्रामीणों ने स्वयं पालकी का प्रबंध किया और महिला को पैदल उठाकर करीब आठ किलोमीटर का सफर तय करते हुए सड़क तक पहुंचाया। इस घटना ने बंद सड़क के कारण ग्रामीणों की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।
न विभाग सक्रिय, न ठेकेदार पर कार्रवाई
स्थानीय लोगों में सड़क बंद होने को लेकर भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो माह बीत जाने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से सड़क को यातायात योग्य बनाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। वहीं, लोगों का आरोप है कि ठेकेदार की ओर से भी सड़क को दोबारा चालू करने के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि जब सड़क लंबे समय से बंद है तो संबंधित विभाग और ठेकेदार पर कार्रवाई के लिए दबाव क्यों नहीं बनाया जा रहा। लोगों का कहना है कि सड़क बंद रहने से सबसे अधिक परेशानी उन परिवारों को हो रही है, जिनके लिए यह सड़क आवागमन का प्रमुख साधन है।
बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
सड़क सुविधा बंद होने का सीधा असर विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव की लड़कियों और बच्चों को हाई स्कूल, सांदर, शीतल नगर हायर सेकेंडरी स्कूल तथा डिग्री कॉलेज बसोहली तक पहुंचने के लिए रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। कीचड़, फिसलन और खराब रास्तों के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को पैदल सफर करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विद्यार्थियों को समय पर स्कूल और कॉलेज पहुंचने के लिए घर से काफी पहले निकलना पड़ता है।
बीमार और बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी आफत
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बंद होने का सबसे गंभीर असर बीमार और बुजुर्ग लोगों पर पड़ रहा है। आपात स्थिति में मरीजों को वाहन की सुविधा नहीं मिल पाती और उन्हें पालकी या अन्य साधनों से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
सलोवा की महिला को पालकी के सहारे करीब आठ किलोमीटर तक ले जाने की घटना ने ग्रामीणों की पीड़ा को सामने ला दिया है। लोगों का कहना है कि किसी मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना जीवन-मरण का सवाल हो सकता है, लेकिन सड़क बंद होने के कारण उन्हें ऐसी परिस्थितियों में भी पैदल सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी
स्थानीय निवासियों कृष्ण चंद, दीवान चंद हट्ट गांव के पूर्व सरपंच सुरेंद्र सिंह, शिव कुमार मखोत्रा आदि ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन उनके गांवों के लोगों को आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क बंद होने से उनकी हालत बद से बदतर हो गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब दूरदराज के गांवों तक सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचें। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की कि शाहरा-माश्का सड़क को युद्धस्तर पर बहाल कर यातायात के लिए खोला जाए तथा सड़क बंद रहने के कारणों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़क को बहाल नहीं किया गया तो लोगों का रोष और बढ़ सकता है। फिलहाल, एक बीमार महिला को पालकी में आठ किलोमीटर तक ले जाने की तस्वीर क्षेत्र की बदहाल सड़क व्यवस्था और ग्रामीणों की मजबूरी की कहानी बयां कर रही है।
