जम्मू: क्यों खास है बसोहली की रामलीला? 114 साल से खुले मैदान में मंचन, बिना पारिश्रमिक राम-रावण बनते हैं कलाकार
Basohli Ramleela: बसोहली में ऐतिहासिक रामलीला की तैयारियां जोरों पर हैं, जहाँ कलाकार बिना किसी पारिश्रमिक के रामायण के पात्रों ...और पढ़ें

बसोहली की 114 साल पुरानी रामलीला। (फाइल फोटो)
HighLights
वरिष्ठ कलाकारों के मार्गदर्शन में रिहर्सल में जुटे कलाकार।
बसोहली की रामलीला 114 साल पुरानी परंपरा है।
कलाकार बिना किसी पारिश्रमिक के सेवा भाव से करते हैं मंचन।
जागरण संवाददाता, बसोहली। बसोहली में ऐतिहासिक रामलीला के आयोजन को लेकर तैयारियां इन दिनों जोरों पर चल रही हैं। जैसे-जैसे रामलीला के आयोजन के दिन नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे रामलीला मैदान में कलाकारों की गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। शाम ढलते ही कलाकार रिहर्सल के लिए पहुंचना शुरू कर देते हैं और रात आठ बजे से लेकर देर रात तक रामायण के विभिन्न प्रसंगों, संवादों, अभिनय और गीतों का अभ्यास किया जाता है।
रामलीला क्लब के कार्यालय में इन दिनों रामायण के मधुर गीतों की गूंज सुनाई दे रही है, जिससे पूरे वातावरण में धार्मिक और सांस्कृतिक रंग घुला हुआ है।
क्यों खास है बसहोली की रामलीला?
बसोहली की रामलीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष 1912 में पहली बार बसोहली में रामलीला का मंचन किया गया था। इसके बाद से यह परंपरा लगातार आगे बढ़ती रही है।
100 वर्ष से अधिक पुरानी इस रामलीला ने कई पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने का काम किया है। आज भी स्थानीय लोगों में इस आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिलता है।
वरिष्ठ कलाकारों के मार्गदर्शन में निखर रही नई प्रतिभाएं
रामलीला की तैयारियों के दौरान अनुभवी और वरिष्ठ कलाकार नए तथा युवा कलाकारों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्हें संवाद बोलने की शैली, भाव-भंगिमाओं, पात्रों के अनुरूप अभिनय, मंच पर प्रस्तुति देने के तरीके और रामायण के प्रसंगों की गंभीरता को समझाया जा रहा है।
प्रत्येक कलाकार अपने किरदार को बेहतर ढंग से निभाने के लिए लगातार अभ्यास कर रहा है। यही कारण है कि वरिष्ठ कलाकार रिहर्सल के दौरान छोटी-छोटी बारीकियों पर ध्यान देते हैं, ताकि मंचन के समय हर पात्र अपनी भूमिका को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर सके।
खुले मैदान में रामलीला मंचन का अलग ही आनंद
बसोहली की रामलीला की एक खास विशेषता यह है कि इसका आयोजन खुले मैदान में किया जाता है। खुले वातावरण में दर्शकों के बीच रामायण के प्रसंगों का मंचन देखने का अनुभव अपने आप में अलग होता है। स्थानीय लोग और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले दर्शक इस परंपरा से लंबे समय से जुड़े हुए हैं।
खुले मैदान में आयोजित होने वाली रामलीला में कलाकारों और दर्शकों के बीच एक विशेष जुड़ाव देखने को मिलता है। भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण सहित विभिन्न पात्रों के माध्यम से रामायण की कथाओं को जीवंत किया जाता है। इस आयोजन के जरिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय कला, अभिनय और सामूहिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिलता है।
बिना पारिश्रमिक के सेवा भाव से निभाते हैं किरदार
बसोहली रामलीला की सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक यह है कि कलाकार अपनी कला और सेवा भाव से इसमें भाग लेते हैं। किसी भी कलाकार द्वारा किरदार निभाने के लिए पारिश्रमिक नहीं लिया जाता। कलाकार अपनी रुचि, श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपरा के प्रति समर्पण के साथ रामलीला में हिस्सा लेते हैं।
रामलीला क्लब से जुड़े लोग भी इस आयोजन को सफल बनाने के लिए अपनी ओर से श्रमदान, धनदान और अन्य प्रकार का सहयोग देते हैं। कोई व्यवस्थाओं में हाथ बंटाता है, तो कोई मंचन की तैयारियों में योगदान देता है। कलाकारों से लेकर आयोजन से जुड़े अन्य सदस्यों तक, सभी लोग तन-मन से इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में जुटे रहते हैं।
देर रात तक गूंज रहे रामायण के मधुर गीत
इन दिनों रामलीला मैदान स्थित रामलीला क्लब के कार्यालय में देर रात तक कलाकारों की रिहर्सल जारी रहती है। रामायण के प्रसंगों से जुड़े मधुर गीतों का अभ्यास किया जा रहा है। कलाकार सुर, ताल, शब्दों के उच्चारण और प्रस्तुति को बेहतर बनाने में जुटे हैं।
कार्यालय से सुनाई देने वाले गीतों से ऐसा वातावरण बन जाता है, मानो रामलीला का उत्सव शुरू होने से पहले ही पूरा क्षेत्र भक्तिमय रंग में रंगने लगा हो।
कलाकारों के लिए रिहर्सल का प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण है। लगातार अभ्यास के जरिए वे अपनी प्रस्तुति को बेहतर बनाने और दर्शकों के सामने रामायण के प्रसंगों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं।
