बाल मजदूरी पर कब जागेगा विभाग? कठुआ की कीटनाशक फैक्ट्री से रेस्क्यू 28 में से 23 नाबालिग निकले, FIR दर्ज
कठुआ की बीआर एग्रोटेक कीटनाशक फैक्ट्री से 28 सितंबर को रेस्क्यू किए गए 28 लोगों में से 23 नाबालिग पाए ...और पढ़ें

कठुआ की बीआर एग्रोटेक से रेस्क्यू 23 बच्चे निकले नाबालिग। (फाइल फोटो)
HighLights
कीटनाशक फैक्ट्री से 23 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया।
10 लड़के और 13 लड़कियां नाबालिग निकलीं।
फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ जुवेनाइल एक्ट में एफआईआर।
अजय मीनिया, कठुआ। औद्योगिक क्षेत्र हटली में बीआर एग्रोटेक फैक्ट्री से रेस्क्यू करने वाले 28 लोगों में से 23 नाबालिग निकले हैं। इनमें 10 लड़के और 13 लड़कियां शामिल हैं। इसे देखते हुए कठुआ पुलिस स्टेशन में जुवेनाइल एक्ट के तहत बीआर एग्रोटेक लिमिटेड कीटनाशक कंपनी प्रबंधन के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली गई है। हालांकि, सहायक श्रम आयुक्त कठुआ मुनीर हुसैन का कहना है कि अभी तक उनके पास पूरी रिपोर्ट नहीं आई हैं।
जरूरी रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई करेंगे, जबकि सामाजिक कल्याण विभाग कठुआ की तरफ से भी इसे लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की गई।
सूत्रों के अनुसार जीएमसी कठुआ के डाक्टरों के एक बोर्ड ने सभी रेस्क्यू किए जाने वाले 28 लोगों को मेडिकल किया। इनमें 10 लड़कें और 18 लड़कियां शामिल थीं। मेडिकल करने के बाद पाया गया कि सभी 10 लड़के नाबालिग थे, जबकि 18 में से13 लड़कियां नाबालिग। बोर्ड ने जांच करने के बाद सभी को उम्र प्रमाण पत्र संबंधित विभाग को सौंप दिए। इसके आधार पर पुलिस स्टेशन कठुआ में केस दर्ज कर लिया गया है।
28 बच्चों को कराया गया था रेस्क्यू
बता दें कि 28 सितंबर को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सामाजिक कल्याण विभाग, श्रम विभाग, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी कठुआ, पुलिस, राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने हटली स्थित बीआर एग्रोटेक लिमिटेड कीटनाशक कंपनी में छापा मारा था, जहां बाल मजदूरी के शक पर 28 लड़कें और लड़कियों को रेस्क्यू किया गया।
इसके बाद सभी को बाल निकेतन भेजा गया। इसके बाद जीएमसी में मेडिकल के जरिए इनकी उम्र पता की गई, क्योंकि अधिकांश के पास उम्र का कोई प्रमाण नहीं था। इनके पास सिर्फ आधार कार्ड मिले, जोकि उम्र पता लगाने के लिए काफी नहीं था। बता दें कि दैनिक जागरण ने लगातार इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। जिसमें मजदूरों का सत्यापन न कराना भी शामिल है।
बाल मजदूरी पर क्या हो सकती है फैक्ट्री प्रबंधन पर कार्रवाई
पहली बार अपराध करने पर 6 महीने से लेकर 2 साल तक की जेल की सजा या 20,000 से 50,000 तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। दोबारा अपराध करने पर यदि वही नियोक्ता फिर से बाल मजदूरी करवाते पकड़ा जाता है, तो सजा बढ़ाकर 1 वर्ष से 3 वर्ष तक का अनिवार्य कारावास कर दिया जाता है।
कारखाना अधिनियम, 1948 के नियमों के उल्लंघन और बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने (जैसे जहरीले रसायन या खतरनाक उद्योगों में काम कराना) के कारण श्रम विभाग फैक्ट्री को बंद करने (सील करने) और उसका बिजनेस लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन रद करने की सिफारिश उच्चाधिकारियों से कर सकता है जोकि अभी तक कठुआ श्रम कार्यालय की तरफ से नहीं की गई।
एक फैक्ट्री के बाद कहीं और छापा नहीं
बता दें कि कठुआ के घाटी, चक सकता, बडाला, कीड़िया गंडयाल आदि औद्योगिक क्षेत्रों में 200 से अधिक उद्योग कठुआ में चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बड़े स्तर पर बाहरी और कठुआ के ठेकेदार छोटे बच्चों को उद्योगों में लेकर जाते हैं और वहां उनसे काम करवाते हैं। हटली की एक फैक्ट्री में इसका पर्दाफाश भी हो गया है।
इसके बावजूद श्रम आयुक्त कार्यालय कठुआ की तरफ से बीते 15 दिन में किसी एक फैक्ट्री में भी यह जांच नहीं की गई कि बाल मजदूरी को चेक किया गया हो।
किसी ठेकेदार ने नहीं कराया सत्यापन
बता दें कि डीसी कठुआ की ओर से कुछ दिन पहले आदेश जारी किया गया कि कोई भी ठेकेदार बिना सत्यापन के मजदूरों को कहीं पर काम नहीं कराएगा। इसके बावजूद अभी तक किसी ठेकेदार ने संबंधित पुलिस स्टेशन में यह जानकारी नहीं दी कि वह कहां काम करता है। जबकि हर रोज वाहनों में मजदूरों को भरकर उद्योगों, सरकारी प्रोजेक्ट आदि में ले जाया जाता है।
