रमन शर्मा, अखनूर

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा बुधवार को लाव-लश्कर के साथ जम्मू जिले की अखनूर तहसील में जन अभियान के तहत लोगों की परेशानियां दूर करने पहुंचे थे। उपराज्यपाल के दौरे से निश्चित तौर पर लोगों में खुशी थी, लेकिन उनके मन में अजीब कशमकश भी थी कि जब पुरानी समस्याएं ही दूर नहीं हुई, तो वे महामहिम को नई समस्याओं के बारे में क्या बताएं। कमोवेश यही हाल वहां दूर-दूर से पहुंचे हर पंच-सरपंच और आम लोगों के मन में था। केंद्र सरकार ने बैक टू विलेज कार्यक्रम की शुरुआत इस मंशा से की थी, प्रशासनिक अधिकारी आम लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे, लेकिन लोगों ने महामहिम को बताया कि बैक-टू-विलेज के पहले और दूसरे चरण में हजारों लोगों ने अधिकारियों को बिजली-पानी, खस्ताहाल सड़कों आदि से जुड़ी जो समस्याएं बताई थीं, वे आज भी बनी हैं। ब्लॉक भलवाल की चेयरमैन नेहा राजपूत और चौकी चौरा के चेयरमैन राहुल देव शर्मा ने कुछ इसी तरह उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को अपने मन की बातें बताई। जब लोग उपराज्यपाल से अपनी पीड़ा बयां कर रहे थे तो डीसी जम्मू समेत विभिन्न विभागों के करीब 25 से ज्यादा अधिकारियों की टीम भी वहां मौजूद थी। जनता की तरफ से सवालों की झड़ी लगने के बाद ये अधिकारी इधर-उधर झांकने लगे।

अखनूर में नौ साल में नहीं बन पाई मिनी सचिवालय और ब्लड बैंक की इमारत

ब्लॉक भलवाल की चेयरमैन नेहा राजपूत ने उपराज्यपाल को बताया कि अखनूर में मिनी सचिवालय का निर्माण 2011 में शुरू हुआ, जो नौ साल बाद भी अधूरा है। अखनूर में ब्लड बैंक तक नहीं है। मरीजों को जब खून की जरूरत होती है, तो उन्हें जम्मू रेफर कर दिया जाता है। अखनूर में ब्लड बैंक बिल्डिग का निर्माण भी 2011 में शुरू हुआ था, लेकिन नौ साल से यह काम अटका पड़ा है। राजपूत ने बताया कि वे इस बारे में कई बारे अधिकारियों से बात कर चुकी हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

2017-18 में मनरेगा के तहत हुए काम का अब तक नहीं हुआ भुगतान

चौकी चौरा के चेयरमैन राहुल देव शर्मा ने उपराज्यपाल को बताया कि मनरेगा के तहत 2017-18 में जो काम हुए, उनका आज तक भुगतान नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि ज्यौड़ियां तहसील में 2011 में उपजिला अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ था, जो नौ साल में भी पूरा नहीं हो पाया। उन्होंने इन समस्याओं को बैक-टू-विलेज के पहले और दूसरे चरण में भी उठाया था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे में हम कहां जाएं और किस पर भरोसा करें। कैसे भरोसा करें कि बैक-टू-विलेज के तीसरे चरण में उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। पंचायत घर नहीं होने से मंदिरों में करनी पड़ती है बैठक

सुंगल की सरपंच अंजू शर्मा ने उपराज्यपाल को बताया कि वे पंचायत की सरपंच तो हैं, लेकिन उनकी पंचायत में पंचायत घर तक नहीं है। यही समस्या बलगाड़ा की सरपंच दीपा सिंह ने भी उठाई। नायब सरपंच शाम सिंह, सरपंच प्रशांत सिंह, नेहा शर्मा आदि ने भी कई समस्याएं उपराज्यपाल के समक्ष उठाई। हर तरफ से सवालों की झड़ी लगने के बाद उपराज्यपाल अधिकारियों की तरफ से लगाए गए स्टालों पर गए और उनके पास दर्ज शिकायतों के बारे में पूछा। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को क्षेत्र में अधूरे कार्यो की रिपोर्ट जल्द उनके समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

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