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कौन थे ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह? महाराजा हरि सिंह के जांबाज अफसर, जिन्होंने 5 दिन तक दुश्मन को रोका और बचाया कश्मीर

Published: Mon, 26 Oct 2026 02:05 PM (IST)

विलय दिवस पर ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने 1947 में कबायलियों के हमले को पांच दिनों तक ...और पढ़ें

100 जवानों के साथ पांच दिन तक दुश्मन से लड़े थे ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह। फोटो- इंटरनेट मीडिया

100 जवानों के साथ पांच दिन तक दुश्मन से लड़े थे ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह। फोटो- इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने 1947 में कबायलियों को पांच दिन रोका।

  2. उनके बलिदान ने जम्मू-कश्मीर के विलय में निर्णायक भूमिका निभाई।

  3. विलय दिवस पर जम्मू और बगूना में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की कहानी केवल 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह द्वारा इंस्ट्रूमेंट आफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है। इस ऐतिहासिक फैसले से ठीक पहले कश्मीर की धरती पर एक ऐसी लड़ाई लड़ी जा रही थी, जिसने भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के भविष्य को सुरक्षित रखने में निर्णायक भूमिका निभाई।

यह मोर्चा संभाला था महाराजा हरि सिंह की सेना के चीफ आफ स्टाफ ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने, जिन्हें उनके बलिदान दिवस पर देश आज भी याद करता है।

पांच दिन तक दुश्मन को छकाते रहे ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह

22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान समर्थित कबायलियों ने जम्मू-कश्मीर पर हमला शुरू किया। उनका लक्ष्य तेजी से श्रीनगर पहुंचकर कश्मीर पर कब्जा करना था। उस समय भारतीय सेना अभी जम्मू-कश्मीर नहीं पहुंची थी। ऐसे संकट में ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने करीब 100 सैनिकों के साथ उड़ी सेक्टर में दुश्मन को रोकने का निर्णय लिया।

सामने संख्या में कई गुना बड़ी दुश्मन की ताकत थी, लेकिन उन्होंने पीछे हटने के बजाय मोर्चा संभाला। ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह और उनके जवानों ने करीब पांच दिन तक दुश्मन की बढ़त को रोके रखा। रास्तों और पुलों को नष्ट कर उन्होंने हमलावरों की गति धीमी की। इस दौरान उनके अधिकांश साथी बलिदान हो गए, लेकिन दुश्मन को श्रीनगर की ओर तेजी से बढ़ने का मौका नहीं मिला।

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(फोटो- इंटरनेट मीडिया)

26 अक्टूबर को विलय पत्र पर हस्ताक्षर

26 अक्टूबर को ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह भी वीरगति को प्राप्त हुए। इसी बीच 26 अक्टूबर को महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। अगले दिन 27 अक्टूबर को भारतीय सेना की टुकड़ियां श्रीनगर पहुंचीं और हमलावरों के खिलाफ मोर्चा संभाला।

ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि

विलय दिवस पर जम्मू में ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि दी गई। महावीर चक्र विजेता  ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह चौक में उनके स्मारक पर एक्स सर्विस लीग की ओर से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूर्व सैनिकों और सैन्य अधिकारियों ने उनके योगदान को याद किया।

...तो अलग हो सकता था जम्मू-कश्मीर का इतिहास

सेवानिवृत्त मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल का कहना है कि ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने सीमित संसाधनों और कम सैनिकों के बावजूद दुश्मन को तब तक उलझाए रखा, जब तक भारतीय सेना कश्मीर नहीं पहुंच गई। उनके अनुसार, अगर वह उस समय दुश्मन को रोकने में सफल नहीं होते तो जम्मू-कश्मीर का इतिहास अलग हो सकता था।

जम्मू से सांबा तक याद किए गए ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह

इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विस लीग और सेना के जवानों एवं अधिकारियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस मौके पर सांसद जुगल किशोर शर्मा भी मौजूद थे और उन्होंने जम्मू कश्मीर के भारत के साथ विलय की सफलता का श्रेय ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह को दिया। इसके अलावा सांबा के ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह के गांव बगूना में भी उन्हें याद किया गया।